इन हॉट तरीकों से आप भी दूर कर सकते हैं अपना स्ट्रेस

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नई दिल्ली। हर रिलेशनशिप में एक दौर ऐसा होता है जब उनमे कुछ प्रॉब्लम्स शुरू होने लगतीं हैं। जिनकी वजह से परिवार के साथ साथ ऑफिस में भी दिक्कतें शुरू हो जातीं हैं। लेकिन आपको पता है कि इन स्ट्रेस को दूर करने के लिए महिलाएं और पुरुष अलग अलग तरीके अपनातें हैं। जी हां रिसर्च के मुताबिक, जहां महिलाएं अपने स्ट्रेस को खाने से तो पुरुष बेडरूम में दूर करतें हैं।

स्ट्रेस

स्ट्रेस दूर करने के लिए महिला और पुरुष अलग-अलग तरीके अपनाते हैं

साइक्लोजिस्ट ने अपने नए रिसर्च में पाया कि स्ट्रेस दूर करने और खुद को रिलैक्स करने के लिए जहां महिलाएं खाना शुरू कर देती हैं वहीं पुरुषों को सेक्स करना पसंद होता है इसके अलावा वो पोर्नोग्राफी देखना पसंद करते हैं। माना जाता है कि सेक्स पुरुषों को नेगेटिव थॉट्स दूर करने और ध्यान भटकाने में कारगर होता है।

जबकि महिलाओं के साथ इसके उलट होता है। ब्रिटिश साइक्लोजिकल सोसाइटी डिविजन ऑफ क्लीनिकल साइक्लोजी इन लीवरपूल में एक कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें इस बात का खुलासा किया गया। कॉन्फ्रेंस के दौरान पुरुषों के लिए स्ट्रेस दूर करने के लिए थेरिपी काफी है वहीँ महिलाओं के लिए अपनी फिलिंग शेयर करना रिलीफ लाता है।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर डॉ. जॉन बेरी का कहना है कि पुरुषों के लिए सेक्स से स्ट्रेस दूर करने का मतलब है कि वे सभी चीजों से दूर भाग कुछ अलग करना चाह रहे हैं। दरअसल, सेक्स के दौरान रिलीज होने वाले हार्मोन एंडोर्फिन से खुशी महसूस होती है। ये एक तरह का मेडिकेशन है। यानि पुरुष महिलाओं से थोड़ा अलग हैं। उनकी सेक्स इच्छाएं बहुत ज्यादा होती हैं। ऐसे में स्ट्रेस से लड़ना उनके लिए ये स्वाभाविक तरीका है।

इस रिसर्च में ये भी पाया गया कि फैटी फूड और स्वीट फूड का संबंध स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल से है। ऐसे में ये अभी पता नहीं लग पाया है कि आखिर महिलाएं अक्सर स्ट्रेसमें फूड क्यों खाती हैं?

इस रिसर्च में ऐसे 115 पुरुष और 250 महिलाओं को शामिल किया गया जिन्हें स्ट्रेस था। रिसर्च में देखा गया कि 11% महिलाओं के मुकाबले 27 % पुरुषों ने स्ट्रेस को दूर करने के लिए सेक्स करना और पोर्नोग्राफी को चुनना पसंद किया। वहीं आधे से अधिक महिलाओं का कहना था कि खाने में वे सबसे ज्यादा कंफर्ट महसूस करती हैं।

रिसर्च में ये भी पाया गया कि वर्कप्लेस पर प्रॉब्लम होने पर पुरुषों को थेरेपी की जरूरत होती है जबकि महिलाएं अपनी प्रॉब्लम को दूसरों के साथ डिस्कस करना पसंद करती हैं। उन्हें इससे मानसिक तौर पर ख़ुशी मिलती है  ।

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