बुंदेलखंड में रोटी बैंक के बाद अब स्वच्छता बैंक

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महोबा। सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड क्षेत्र के बुंदेली समाज ने स्वच्छता बैंक की स्थापना कर आम जन के सामने एक बड़ा संदेश दिया है। स्वच्छता बैंक में बुंदेली समाज द्वारा लगाए गए नवयुवकों के माध्यम से शहर में गंदगी को लेकर चौकन्ना रहेंगे और जगह-जगह स्वच्छता बैंक के कूड़ेदान सार्वजनिक स्थल में रखे जाएंगे। स्वच्छता बैंक सं जुड़े नवयुवक कूड़ेदानों में एकत्र हुए कूड़े को शहर के बाहर फिंकवाने का इंतजाम करेंगे।

स्वच्छता बैंक

सार्वजनिक स्थलों पर रखे जाएंगे कूड़ेदान

बुंदेली समाज के पदाधिकारी व कार्यकर्ता जहां एक ओर रोटी बैंक के माध्यम से शहर में असहाय विकलांग और गरीब लोगों को पेट भर खाना देते हैं, वहीं दूसरी ओर बुंदेली समाज ने रविवार को स्वच्छता बैंक की स्थापना की। इसकी स्थापना आम जन मानस को जागरूक करने के साथ साथ शहर को साफ-सुथरा बनाने के उद्देश्य से की गई है। बुंदेली समाज के तारा पाटकर ने बताया कि स्वच्छता बैंक के माध्यम से शहर को साफ करने व स्वच्छ रखने में बड़ा योगदान होगा और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बैंक द्वारा जगह-जगह कूड़ेदान रखे जाएंगे। आम लोगों को इस कूड़ेदान में ही कचरा डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वच्छता बैंक में निस्वार्थ भाव से लगे नवयुवकों द्वारा कूड़ेदानों में एकत्र कचरे को फिंकवाएंगे।

बुंदेलखंड में इस बार तीसरा सूखा

मौसम की मार झेल रहे बुंदेलखंड के बिगड़े हालात नए नहीं हैं। लेकिन इस बार मुसीबत ज्यादा है। लोगों के पास खाने के लिए अनाज नहीं है। कई इलाकों में पानी खत्म हो चुका है। यहां के लोग नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। चारा नहीं होने से जानवर दम तोड़ रहे हैं। लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। यहां तक कि लोगों की शादी भी पोस्टपोन हो रही है। बुंदेलखंड में इस बार तीसरा सूखा बुंदेलखंड में 1987 से लेकर अब तक 19 सूखे पड़ चुके हैं। इस बार लगातार तीसरा सूखा पड़ा है। पानी की कमी से यहां की जमीनें बंजर हो रही हैं। झांसी के खिसनी बुजुर्ग गांव के 3300 एकड़ रकबे में 100 एकड़ में भी खेती नहीं हुई है। सिलगुआ गांव के ओमप्रकाश कहते हैं कि घरों में न रोटी है, न पानी। लोग गांव-घर छोड़ रहे हैं। सरकार ने घोषणा कर दी है, लेकिन त्‍वरि‍त मदद नहीं पहुंची है।

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