स्‍टार्टअप इंडिया की ये हैं सात चुनौतियां

नई दिल्‍ली। स्‍टार्टअप इंडिया अभियान शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सफल बनाने के लिए कई अनूठी घोषणाएं की हैं। लेकिन कुछ चुनौतियां इन घोषणाओं पर भारी पड़ सकती हैं। पेश है रिपोर्ट:-

स्‍टार्टअप

स्‍टार्टअप इंडिया की चुनौतियां

1 – परमिट राज

प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि स्‍टार्टअप शुरू करने वालों को लाइसेंस और परमिट राज खत्‍म किया जाएगा। लेकिन जगजाहिर है कि भारत में सरकारी कार्यालयों से फाइल पास कराना टेढ़ी खीर साबित होता है। तमाम तरह की मंजूरियां अलग से मुश्किल खड़ी करती हैं। ऐसे में नए उद्यमी या स्‍टार्टअप के लिए इनसे निपटना आसान नहीं होगा।

2 – घूसखोरी

मोदी के एक्‍शन प्‍लान में इस बात का जिक्र है कि स्‍टार्टअप के लाभ पर तीन साल तक कोई निगरानी नहीं रखी जाएगी और न ही किसी तरह की आधिकारिक जांच होगी। ऐसे में यह भी संभव है कि स्‍टार्टअप्‍स को फाइल पास कराने के बदले अपने मुनाफे का एक हिस्‍सा सरकारी दफ्तर के घूसखोरों को देने का वादा करना पड़े।

3 – टैक्‍स ढांचा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिए हैं कि स्टार्टअप्स के लिए टैक्स ढांचा अलग हो सकता है। पहले से ही देश में करों को सरल बनाने के लिए लाए जाने वाले जीएसटी विधेयक को लेकर सियासी गतिरोध जारी है। ऐसे में ये कहना मुश्किल ही होगा कि सरकार स्टार्टअप के लिए अलग से कानूनी ढांचा प्रस्तुत कर पाएगी और अगर ऐसा होता भी है तो इसमें कितना समय लगेगा ये भी एक चुनौती होगी। मोदी के स्‍टार्टअप इंडिया कैम्‍पेन से पहले कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा भी था, असहिष्‍णुता और स्‍टार्टअप साथ नहीं रह सकते। मोदी सरकार को कांग्रेस असहिष्‍णु मानती है, इसलिए भाजपा के लिए यह बिल पास कराना भी मुश्किल ही होगा।

4 – स्‍टार्टअप फंड

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए विचारों को साकार रूप देने के लिए सरकार दस हजार करोड़ रुपए का फंड देगी। इसमें ढाई हजार करोड़ रुपए सीधे-सीधे स्‍टार्टअप के लिए होंगे। लेकिन भारत के करोड़ों युवाओं के विचारों को साकार रूप देने के लिए क्‍या इतना फंड काफी होगा?

5 – सीड फंडिंग

भारत में सीड फंडिंग का कल्चर भी अब तक विकसित नहीं हो पाया है। जिन आइडियाज को सीड फंडिंग की जरूरत होती है, उन्हें वह नहीं मिल पाता। सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान स्टार्टअप्स को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन इतना ही काफी नहीं है। भले ही सरकार ने लोन वगैरह की स्कीमों को लॉन्च किया है, लेकिन यह विचार करने की जरूरत है कि क्या इतना ही काफी है। इसे बढ़ावा देने पर भी विचार करने की जरूरत थी।

6 – शिक्षा प्रणाली

पीएम ने कहा कि युवाओं को जॉब सीकर की जगह जॉब क्रिएटर बनना होगा। लेकिन इस काम में भारत की शिक्षा प्रणाली आड़े आती है। यहां की शिक्षा प्रणाली में जॉब क्रिएटर बनने की प्रवृत्ति नहीं दिखती। इसके उलट अमेरिका में 70 पर्सेंट नौकरियां स्टार्टअप्स के जरिए ही निकली हैं। ऐसे में जॉब क्रिएटर बनना आसान नहीं होगा।

7 – कौशल विकास

भारत में तकनीकी आधारित कई स्टार्टअप्स पहले ही काम कर रहे हैं। लेकिन जमीनी तौर पर काम करने वाले स्टार्टअप्स जैसे कृषि, जैव तकनीकी और अन्य के लिए युवाओं का स्किल डिवेलपमेंट यानी कौशल विकास  करना होगा। इन क्षेत्रों के लिए स्किल डवलपमेंट अभियान चलाने पर सरकार को खास ध्यान रखना होगा। यह संभव न हुआ तो सरकार की सारी कवायद बेकार साबित हो सकती है।

स्‍टार्टअप का सुनहरा भविष्‍य

भारत 4,200 एंटरप्राइजेज के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर है। भारत सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन से ही स्टार्टअप्स के मामले में पीछे है। दुनियाभर के निवेशक भारत को स्टार्टअप्स के नए ठिकाने के तौर पर देख रहे हैं। भारत की युवा आबादी और संसाधन इसमें ऊर्जा भर सकते हैं। इस लिहाज से भारत में स्‍टार्टअप का भविष्‍य सुनहरा भी हो सकता है।

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