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हड़ताली राज्य की लिस्ट में शामिल हो रहा उत्तराखंड!

देहरादून। आये दिन होने वाली हड़तालों के चलते ये बात सही साबित हो रही है कि उत्तराखंड भी हड़ताली राज्य  लिस्ट में शामिल हो गया है। प्रदेश में एक कर्मचारी संगठन की हड़ताल समाप्त नहीं होती तब तक दूसरे कर्मचारी संगठन हड़ताल शुरू कर देते हैं। बीती 23 दिसम्बर से कोषागार कर्मी बेमियादी हड़ताल पर हैं और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बावजूद इसके शासन की ओर से निलंबित कर्मियों को वेतन बांटा जा रहा है। जी हां, शासन ने हड़ताली राज्य बनने से पहले कल्पिक व्यवस्था के तौर पर पीआरडी जवानों की कोषागार में तैनाती करते हुए सरकारी खजाने की कुंजी उनके हाथों में दी लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला।

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हड़ताली राज्य 2

हड़ताली राज्य होने से विकास के काम रुकेंगे

हाल के दिनों में नारी निकेतन को लेकर प्रदेश से लेकर केंद्र तक इतना हो-हल्ला हुआ और मामले से जुड़े छह कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया गया, लेकिन उन निलंबित कर्मचारियों के वेतन पीआरडी जवानों ने जारी कर दिए। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग के बर्खास्त कर्मचारियों के वेतन भी जारी कर दिये गए। हद तो तब हुई जब वन विभाग के मृतक कर्मचारी का वेतन भी बांट दिया गया। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर तैनात पीआरडी कर्मी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। कर्मचारी को 54 हजार रुपए की जगह 2 लाख 61 हजार रुपए एक महीने का वेतन जारी कर दिया गया। पूरे मामले में कोई भी वरिष्ठ अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं इस हड़ताल की वजह से स्टांप पेपर की कमी हो गई है।

वन, लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के बिलों के भुगतान बंद हो गये हैं। पेंशन भुगतान के मामले लंबित चल रहे हैं। कोषागार कर्मियों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के अड़ियल रवैय्ये की वजह से उनकी मांगें पूरी नहीं हो पा रही हैं। मांगों के संबंध में जीओ तैयार है लेकिन मुख्य सचिव एक साइन करना जरूरी नहीं समझ रहे इसलिये वो जारी भी नहीं हो रहा।

 
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हड़ताली राज्य 3

हड़ताल से कई विभागों का काम अटका

उधर नैनीताल में भी कोषागार कर्मचारियों की हड़ताल से मुख्य कार्यालय का काम ठप है। जिसके चलते कई विभागों के कर्मचारियों को अभी भी वेतन नहीं मिला है। गांव से भूमि समेत अन्य कामकाज के लिए कोषागार पहुंच रहे लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है, तो स्टम्प नहीं मिलने से भी लोगों को अपने जरूरी कामों में काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस बीच, कोषागार कर्मचारी संगठन अब सोमवार से तालाबंदी करने का मन बना रहे हैं।

फिलहाल जिस तरह से सरकारी खजाने को लुटाया जा रहा है और जरूरी कामों को अटकाया जा रहा है, ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वाकई नौकरशाह प्रदेश को हड़ताली राज्य बनाना चाहते हैं। आखिर अधिकारी हड़ताल खत्म कराने के लिये कोई ठोस और कारगर पहल का कब तक इंतजार करेंगे।

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