वकीलों की हड़ताल अवैध, जारी रखने पर होगा केस

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इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खण्डपीठ में जारी हड़ताल को लेकर दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अवध बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई करने बैठी सात न्यायाधीशों की वृहदपीठ ने फैसला सुनाया। मामले से संबधित महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने प्रमुख सचिव गृह की रिपोर्ट न्यायालय में पेश करते हुए बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान हो गई है।

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हड़ताल को अवैध करार

इसके अलावा लखनऊ खण्डपीठ में 11फरवरी से शुरू वकीलों की हड़ताल को उच्च न्ययालय ने अवैध करार दिया है। जल्द ही काम कर वापस लौटने का निर्देश भी दिया है। साथ ही न्यायालय ने कहा है कि यदि कोई वकील किसी को हड़ताल करने के लिए मजबूर करता है तो ऐसे में कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।

बार के पूर्व महासचिव के प्रेक्टिस पर लगाई रोक

अवध बार के पूर्व महासचिव विशाल दीक्षित को 23 फरवरी तक हलफनामा पेश करने को कहा गया है। इसके साथ ही न्यायालय ने विशाल दीक्षित के प्रेक्टिस पर रोक लगाते हुए कहा कि न्यायालय परिसर में हथियारों का उपयोग व हथियारों का प्रदर्शन गंभीर अपराध हैं। कोर्ट ने विशाल दीक्षित के प्रदेश की किसी भी अदालत या अधिकरण में वकालत करने पर रोक लगा रखी है।

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