हनुमान जयंती पर विशेष योग में करें पूजन, होगा लाभ

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नई दिल्‍ली। ऐसी मान्‍यता है कि कलयुग में सिर्फ हनुमानजी अजर और अमर हैं। पुराणों में बताया गया है कि हनुमानजी का जन्‍म एक करोड़ पिच्चासी लाख अट्ठावन हज़ार एक सौ तेरह वर्ष पहले चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में प्रात: 6:03 बजे हुआ था। चैत्र मास की पूर्णिमा को ही माता अंजनी के गर्भ से हनुमान जी ने जन्म लिया, यह जन्मतिथि विशेष है। इस बार हनुमान जयंती खास है।

हनुमान जयंती

हनुमान जयंती पर कई सालों बाद बना शुभ योग

इस बार 11 अप्रैल 2017 को कई वर्षों बाद चित्रा नक्षत्रयुता परम पुर्णदायिनी स्नानदानकी चैत्री पूर्णिमा मंगलवार के दिन इस अति विशिष्ट योग में हनुमानजी की उपासना, पूजा-पाठ करने का विशेष लाभ भक्तों को प्राप्त होगा। इस बार एक विशेष बात यह भी है कि इस संवत्सर के राजा भी मंगल हैं।

पूजा करते समय रखें ध्‍यान

पूजन विधिपूर्व या उत्तर की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठें। लाल धोती और ऊपर वस्त्र कोई चादर, दुपट्टा आदि डाल लें।

ऐसे करें पूजन

अपने सामने छोटी चैकी पर लाल वस्त्र बिछाकर तांबे की प्लेट पर लाल पुष्पों का आसन देकर हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति पर सिन्दूर से टीका कर लाल पुष्प अर्पित करें, मूर्ति पर सिन्दूर लगाने के पश्चात् धूप-दीप, अक्षत, पुष्प एवं नैवेध आदि से पूजन करें। सरसों या तिल के तेल का दीपक एवं धूप जला दें। इस दिन जीवन में अभावों, कष्टों के निवारणार्थ हनुमान जी के निम्न द्वादश नामों का स्मरण 151 बार करें – हनुमान, अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट, फाल्गुन सखा, पिंगलाक्ष, अमित विक्त्रम, उदधिक्त्रमण, सीताशोक विनाशन, लक्ष्मण प्राण दाता और दशग्रीवदर्पहा।

कामना पूर्ति के लिए जलाएं दीये

कामना पूर्ति के लिए करें दीपदान हनुमानजी के लिए दीप-दान अतिप्रिय है। हनुमानजी के दीप-दान में देव प्रतिमा के आगे, प्रमोद के अवसर पर, ग्रहों के निमित्त, ग्रहों में और चैराहों पर इन छ: स्थलों में दीप जलाना चाहिए। स्फटिक शिवलिंग के समीप शालीग्राम शिला के निकट हनुमानजी के लिए किया हुआ दीप-दान भोग और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कहा गया है। विघ्न एवं संकटों का नाश करने के लिए गणेश जी के निकट हनुमान जी के लिए दीपदान करें, व्याधि नाश तथा दुष्ट ग्रहों की दृष्टि रक्षा के लिए चैराहों पर दीप-दान करना चाहिए।

पीपल के नीचे भी जलाएं दीये

बन्धन से छूटने के लिए राजद्वार अथवा कारागार के समीप दीप-दान करना चाहिए। सम्पूर्ण कार्य की सिद्धि के लिए पीपल और वट वृक्ष के नीचे दीप-दान करने का विधान है। भय निवारण और विवाद की शान्ति के लिए, ग्रह संकट एवं ज्वर उतारने आदि के लिए राजद्वार पर हनुमानजी के लिए दीप-दान अवश्य करना चाहिए।हनुमानजी की पूजा में विशेष सावधानियां रखनी चाहिए- हनुमान उपासना में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना आवश्यक है। हनुमानजी की मूर्ति को जल से एवं पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिन्दूर में तिल के तेल को मिलाकर पूरे शरीर पर लगाना चाहिए, इससे हनुमान प्रसन्न होते हैं।

सभी मंदिरों में हो रही तैयारियां

हनुमान जयंती पर शहर के प्रमुख मंदिरों में तैयारियां पूरी हो गई हैं। सोमवार से ही हवन, शोभा यात्रा की शुरूआत हो जाएगी। मंगलवार को शहर के करीब 120 मंदिरों में भव्य हवन-पूजन और भंडारे का आयोजन किया गया है। बड़ा बाग स्थित हनुमान मंदिर, सिविल लाइंस हनुमान मंदिर और अलखनाथ में संकटमोचन मंदिर की विशेष प्रतिष्ठा है। यहां हनुमान जयंती पर भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ती है। मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने से कामना पूरी होती है।

मंत्र जाप से प्रसन्‍न होते हैं हनुमानजी

हनुमानजी को लाल पुष्प प्रिय हैं, अत: ऐसे पुष्पों को ही चढ़ाना चाहिए।- नैवेध में गुड़ और गेहूं की रोटी का चूरमा आदि चढ़ाना चाहिए।- हनुमानजी की उपासना में चरणामृत का विधान नहीं है।- हनुमान उपासना में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके साधक को मंत्र जाप करना चाहिए।- हनुमानजी को जो भी प्रसाद चढ़ाया जाये वह शुद्ध घी में शुद्धतापूर्वक बना होना चाहिए।- यदि मंगलवार से हनुमान उपासना प्रारम्भ की जाये जो विशेष अनुकूल होती है। इस बार यह विशेष योग 11 अप्रैल 2017 दिन मंगलवार को है।

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