उन्नाव गैंगरेप: हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- आरोपी विधायक को गिरफ्तार करना चाहते हो या नहीं

इलाहाबाद: उन्नाव गैंगरेप मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन की उदासीनता देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त तेवर अपनाया है। इस मामले को लेकर सख्ती से पेश आते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आप लोग आरोपी विधायक को गिरफ्तार करना चाहते हो कि नहीं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार से इस मामले का जवाब देने के लिए कहा है। हाईकोर्ट का यह बयान तब आया है जब एसआईटी ने आरोपी विधायक के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि 4 जून 2017 को विधायक पर रेप का आरोप लगा। एसआईटी की रिपोर्ट पर 11 अप्रैल 2018 को FIR दर्ज की गई। कोर्ट ने कहा है कि विधायक के खिलाफ जो भी आरोप हैं वो सभी गंभीर हैं। इस पर जवाब देते हुए में एसआईटी अधिकारी ने कहा है कि वे अधिकारी को गिरफ्तार करेंगे। महाधिवक्ता ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी कार्रवाई होगी।

आपको बता दें कि उन्नाव गैंगरेप कांड में एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद भी आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (अपहरण कर शादी के लिए दवाब डालना), 376 (बलात्‍कार), 506(धमकाना) और पॉस्‍को एक्‍ट के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं योगी सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से भी कराने का फैसला किया है।

गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आरोपी विधायक की गिरफ्तारी के सवाल पर यूपी के डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि वह अभी सिर्फ आरोपी हैं। उनकी गिरफ्तारी का फैसला सीबीआई करेगी।

क्या है मामला-

आपको बता दें कि उन्नाव की रहने वाली एक युवती ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप और अपने पिता को मरवाने का आरोप लगाया है। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गुंडागर्दी और गैंगरेप का आरोप लगाते हुए रविवार को पीड़िता का पूरा परिवार लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गया। इस दौरान पीड़िता ने आत्मदाह करने की कोशिश भी की थी।

इस बीच पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पीड़िता के पिता की सोमवार को मौत हो गई। पीड़िता का आरोप है कि पिछले साल 4 जून को कुलदीप सिंह सेंगर और उसके कुछ गुर्गों ने उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसने पुलिस से इसका शिकायत की लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि दर्ज कराई गई प्राथमिकी में से विधायक कुलदीप सिंह का नाम तक हटा दिया गया।

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