फिल्म रिव्यू : ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ देखने जाना मतलब फुल टाइम और पैसे की बर्बादी

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फिल्म का नाम: हाफ गर्लफ्रेंड
डायरेक्टर: मोहित सूरी
स्टार कास्ट: अर्जुन कपूर, श्रद्धा कपूर, विक्रांत मस्सी, रिया चक्रवर्ती, सीमा बिस्वास
रेटिंग: 2 स्टार

हाफ गर्लफ्रेंड

हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म रिव्यू

मुंबई। फेमस राइटर चेतन भगत की नोवल ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ पर मोहित सूरी ने फिल्म बनाई है। इससे पहले भी चेतन भगत की ‘टू स्टेट्स’ नोवल पर फिल्म बन चुकी है, जिसे खूब पसंद किया गया। टू स्टेटेस में आलिया भट्ट और अर्जुन कपूर थे  तो वहीं हाफ गर्लफ्रेंड में श्रद्धा कपूर और अर्जुन कूपर की जोड़ी नज़र आएगी। आइये फिल्म की समीक्षा करते हैं और देखते हैं कि क्या इस बार चेतन भगत की कहानी और मोहित सूरी के डायरेक्शन का जादू चलेगा।

कहानी

ये कहानी बिहार के लड़के माधव झा (अर्जुन कपूर) और दिल्ली की लड़की रिया सोमानी (श्रद्धा कपूर) की है। माधव स्पोर्ट्स कोटे से दिल्ली की यूनिवर्सिटी में पढ़ने आता है। वहां उसकी मुलाकात रिया से होती है। माधव और  रिया दोनों का बास्केटबॉल में इंटरेंस्ट होता है। बास्केटबॉल खेलते- खेलते ही दोनों की दोस्ती हो जाती है और माधव को  रिया से प्यार हो जाता है। लेकिन  रिया, माधव से प्यार नहीं करती। माधव को अंग्रेजी नहीं आती जिसकी वजह से उसका बार-बार मजाक उड़ाया जाता है। माधव की लव स्टोरी में उसके दोस्त शैलेश (विक्रांत मस्सी) का भी अहम योगदान होता है।

कहानी में एक ऐसा ट्विस्ट आता है जब माधव और रिया अलग हो जाते हैं और माधव अपने गांव वापस लौट जाता है, उधर रिया भी लंदन चली जाती है। माधव और रिया का मिलन होता है या नहीं और अगर होता भी है तो कैसे इसके लिए आपको सिनेमाघर तक जाना होगा।

डायरेक्शन

मोहित सूरी का डायरेक्शन अच्छा है, हालांकि फिल्म की कहानी बहुत कमजोर है। इसमें टू- स्टेट्स जैसी बात नहीं। लोकेशन्स, डायलॉग्स, सिनेमैटोग्राफी और कैमरा वर्क भी अच्छा है लेकिन फिर भी कहानी दर्शकों को बांध पाने में असफल है।

एक्टिंग

अर्जुन कपूर ने बिहारी बाबू का रोल बखूबी निभाया है। वहीं श्रद्धा कपूर का काम भी बहुत अच्छा है। फिल्म में अर्जुन के दोस्त का रोल निभा रहे विक्रांत मस्सी का परफॉर्मेंस भी जबरदस्त है। फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी ठीक काम किया है।

म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और कहानी के साथ-साथ चलता है। ‘फिर भी तुमको चाहूंगा’ सबसे अच्छा सॉन्ग है। बाक़ी गाने ठीक तो हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले के दौरान कहानी की लय को तोड़ते हैं।

देखें या नहीं

चेतन भगत की बाकी नोवेल्स पर बनी फिल्म के बारे में सोचकर जा रहे हैं तो निराश होंगे। हां, अगर अर्जुन या श्रद्धा के फैंन हैं तो एक बार फिल्म देखी जा सकती है।

 

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