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हार्ट अटैक 23, समय मात्र चार घंटे, नयी जिंदगी

आपने कभी सुना है कि चार घंटे में 2 हार्ट अटैक। सुनेंगे तो भी यकीन नहीं होगा कि कोच्चि में अपने सात साल के पोते के साथ क्रिकेट खेल रहे 60 साल के अजीत को चार घंटे के छोटे से अंतराल में 23 हार्ट अटैक पड़े और वह जिंदा बच गये।

हार्ट अटैक

अजीत लम्बे समय से चेन स्मोकर थे। उनकी छाती में अचानक तेज दर्द उठा। उन्हें निकटवर्ती अस्पताल ले जाया गया। जहां ईसीजी ने हार्ट अटैक की पुष्टि की। उनके उपचार के बार बार के प्रयास बेकार हुए क्योंकि उनके हार्ट ने कई बार काम करना बंद किया। बाद में उन्हें एस्टर मेडसिटी लाया गया। लेकिन यहां भी अस्पताल उनके लगातार पड़ रहे हार्ट अटैकों से उनका ब्लाक नहीं निकाल पाया।

हार्ट अटैक पड़ते रहे धड़कता रहा दिल

एस्टर मेडसिटी के वरिष्ठ ह्रदयरोग विशेषज्ञ डा. अनिल कुमार कहते हैं कि चार घंटे में 23 हार्ट अटैक आमतौर पर नहीं देखे जाते हैं। इसमें सघन उपचार का समय निकल जाता है। काम्पलिकेशन के चलते दिल की धड़कन रुक जाती है। जिसे कई बार चालू करना पड़ा। उनके ब्लाक को स्टेंटिंग के जरिये ठीक किया गया। अब एक हार्ट अटैक से दिल के एक हिस्से को उनके खून का प्रवाह रुक रहा था लेकिन फिर भी वह धड़क रहा था। दिल के दौरे का मतलब होता है दिल की धड़कन का रुक जाना जिसे चालू करने के लिए शॉक देना पड़े। डाक्टरों के अनुसार उनके पास जिंदगी का थोड़ा समय बचा है। खून की सप्लाई प्रभावित हुई है। दिल केवल 30 प्रतिशत काम कर रहा है। अजीत अपने रोजमर्रा के काम निपटा सकते हैं लेकिन अब वह सिगरेट पीना छोड़ चुके हैं।

 

अजीत का कहना है कि वह अपनी नयी जिंदगी जो उन्हें मिली है उसके प्रति सचेत हैं। रोज सुबह करीब 20 मिनट वह टहलते हैं। डाक्टरों की सलाह के अनुरूप भोजन लेते हैं। हालांकि यह आसान नहीं है। लेकिन हर दिन गुजरने के साथ वह खुद को और मजबूत महसूस करते हैं।

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