अब हिटलर के घर पर होगा सरकार का कब्जा

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हिटलर के घरवियना। ऑस्ट्रिया स्थित हिटलर के घर को लेकर चल रहा विवाद जल्द ही खत्म हो जाएगा। यहां के सांसदों ने इस घर को जब्त करने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इस घर के साथ आखिर क्या किया जाएगा। सांसदों ने बुधवार देर शाम इस नए कानून को बहुमत के साथ अपनी मंजूरी दे दी। सरकार के मुताबिक, ऑस्ट्रिया के उत्तरी शहर ब्राउनो एम इन में स्थित यह घर नव-नाजी समर्थकों का तीर्थस्थान बन सकता है। इसी को देखते हुए सरकार ने यह प्रस्ताव रखा था। ऑस्ट्रियन सरकार लंबे समय से इस घर के मालिक के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रही थी।

हिटलर के घर पर सरकार करेगी कब्जा

मालूम हो कि 20 अप्रैल 1889 को इसी घर में हिटलर का जन्म हुआ था। इस घर का मालिक पोमर परिवार है। उन्होंने साल 1972 से ही सरकार को यह घर किराये पर दिया हुआ था। अब हिटलर के घर के बदले उन्हें सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की रकम क्या होगी, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। इस घर के भविष्य को लेकर सरकार ने क्या फैसला किया है, इसकी तस्वीर फिलहाल साफ नहीं हो सकी है। इमारत के साथ क्या किया जाए, इसे तय करने के लिए 13 सदस्यों की एक समिति बनाई गई थी। इसी साल अक्टूबर में ऑस्ट्रिया के आंतरिक मंत्री ने कहा था, ‘हिटलर के घर को तोड़ दिया जाएगा। इस इमारत की नींव बची रहेगी, लेकिन इसके ऊपर एक नई इमारत बनाई जाएगी। इस इमारत का इस्तेमाल या तो समाजसेवा के लिए या फिर स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जाएगा।’

हालांकि, बाद में समिति के कई सदस्यों ने आंतरिक मंत्री की योजनाओं को खारिज कर दिया था। उन्होंने साफ किया था कि इमारत को तोड़ने के प्रस्ताव पर उन्होंने अपनी सहमति नहीं दी है। अक्टूबर में एक संयुक्त बयान जारी कर समिति के सदस्यों ने कहा, ‘इस इमारत को गिराने का मतलब ऑस्ट्रिया के नाजी इतिहास को नकारना होगा।’ गुरुवार को ऑस्ट्रिया के उच्च सदन के एक सांसद ने आंतरिक मंत्री और ब्राउनो शहर के मेयर से बातचीत के बाद बताया कि इस इमारत को तोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि इसका पुनर्निर्माण कर समाजसेवा के कामों में इस्तेमाल किया जाएगा। सांसद ने कहा, ‘काफी लंबी बातचीत के बाद हमने इसे नहीं गिराने का फैसला किया है।’

हिटलर जब छोटा था, तभी उसका परिवार यहां से चला गया था। इसके बावजूद यह घर लंबे समय से ऑस्ट्रिया को परेशान करता आ रहा है। नाजी विचारधारा का समर्थन करने वाले कई लोग दुनिया भर से यहां पहुंचते हैं। ऐसे में सरकार को डर था कि यह जगह नव-नाजीवाद के लिए एक तीर्थ के रूप में तब्दील हो सकती है। हर साल हिटलर के जन्मदिन पर फासीवादी-विचारधारा का विरोध करने वाले लोग इस इमारत के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हैं। इस घर के पास रखे एक स्मारक चिह्न पर लिखा है, ‘शांति, आजादी और लोकतंत्र के लिए। लाखों मरे हुए लोग चेतावनी देते हैं कि फासीवाद अब कभी दोबारा नहीं।’ यह घर साल 2011 से ही खाली पड़ा था। इसी साल इस घर के मालिक के साथ ऑस्ट्रिया सरकार का विवाद शुरू हुआ था।

पोमर परिवार पिछले करीब 100 सालों से 8,600 फुट में फैले इस पीले रंग के घर का मालिक रहा है। साल 1971 से ही सरकार 5 हजार डॉलर महीने के किराये पर इस घर का इस्तेमाल करती आ रही थी। इस इमारत को सरकार ने विकलांग लोगों के सहायता केंद्र के रूप में विकसित किया था। फिर 2011 में दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता उस वक्त टूट गया जब पॉमर ने यहां मरम्मत करवाए जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। काफी पुरानी होने के कारण इस इमारत को मरम्मत की सख्त जरूरत थी। उसके बाद यह घर खरीदने के लिए ऑस्ट्रिया के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने पोमर को प्रस्ताव भी दिया, लेकिन उन्होंने घर बेचने से इनकार कर दिया। इसी साल जुलाई में सरकार ने इस घर को पोमर के कब्जे से लेने की अनुमति दे दी।

कई लोगों का कहना है कि इस इमारत को शरणार्थी केंद्र बना देना चाहिए। वहीं कई लोगों का मानना है कि यह इमारत नाजी शासन से ऑस्ट्रिया की मुक्ति के प्रतीक के तौर पर एक संग्रहालय में तब्दील कर देना चाहिए।

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