हिटलर के देश से आएगी बंदर नसबंदी की मशीन

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नैनीताल (गरमपानी)। पर्वतीय राज्य में बंदर और लंगूरों से खेती को बचाने के लिये आखिर वन महकमे ने पहल शुरु कर ही दी। बंदरों की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने की बंधियाकरण की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके लिए जर्मनी की अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जायेगा। ऑपरेशन को सफल करने के लिये हिमाचल से विशेष प्रशिक्षित पांच डॉक्टरों का दल भी हरिद्वार पहुंच चुका है। जो प्रदेश के पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण देगा। शुरुआत चिडि़यापुर (हरिद्वार) से होगी। फिर नैनीताल और अल्मोड़ा जनपदों में इसे शुरु किया जायेगा। खास बात ये है कि रोजाना 50 बंदरों का बंधियाकरण और इतने ही बंदर रेस्क्यू सेंटर में कैद भी किए जाएंगे।

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उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में जंगली जानवर खासतौर पर बंदरों के फसल चौपट करने से किसान खेती छोड़ने लगे हैं। कृषि पर बढ़ते संकट से निपटने के लिये राज्य सरकार ने नसबंदी का खाका तैयार किया था लेकिन सफल नहीं हो सका। देर से ही सही पर वन महकमे ने कारगर कार्ययोजना तैयार कर मिशन बंधियाकरण की पहल की है।

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हिमाचल में ये योजना बीते पांच वर्षो से चल रही है और वहां सफल साबित हुई। वहां हुए प्रयोग से सबक लेते हुए यहां बनी योजना में जर्मनी से मंगाई गई महंगी और अत्याधुनिक मशीनों की खास भूमिका होगी। हिमाचल के पांच डॉक्टरों का दल चिडि़यापुर पहुंच गया है, जो राज्य के पशु चिकित्सकों को मशीन के प्रयोग की तकनीकी जानकारी देगा ही। बंदरों को पकड़कर उन्हें किस प्रकार बंधियाकरण किया जायेगा ये भी बतायेगा।

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अगले चरण में रानीबाग (नैनीताल) और तीसरे चरण में अल्मोड़ा स्थित रेस्क्यू सेंटर में इस योजना को शुरु किया जायेगा। हालांकि योजना से पहले यहां भी विशेषज्ञ यहां के डॉक्टर्स को भी इस बात का पूरा प्रशिक्षण देंगे। योजना कारगर रही तो बंदरों की बढ़ती तादाद पर न सिर्फ अंकुश लगेगा, बल्कि पहाड़ में फसल क्षति रोक किसानों के मनोबल को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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जानिए क्या है छड़ा गांव का हांका फॉर्मूला

गरमपानी। बीते 13 वर्षो की भागदौड़ से बंदरों को खदेड़ने में सफल रहे छड़ा गांव को एक नई पहचान मिल गयी है। सुर्खियों में आने के बाद अब पूरे राज्य में सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिये हांका लगाने का फॉर्मूला दिया जाएगा। मुख्य वन संरक्षक एवं वन्य जीव प्रशासक डॉ. धनंजय मोहन ने कहा, ग्रामीणों की यह तरकीब वाकई नायाब है। चूंकि बंदर उत्पाती और उतना ही डरपोक भी होता है लिहाजा नियमित ड्यूटी की तरह हांका लगा खदेड़ना सफल प्रयोग है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों को प्रेरित भी किया जाएगा। डॉ. मोहन का ये भी कहना है कि ‘जर्मनी से अत्याधुनिक मशीनें मंगा ली गयी हैं। हिमाचल के पांच सदस्यीय डॉक्टरों का दल चिडि़यापुर पहुंच चुका है। जो हमारे पशु चिकित्सकों को मशीन के संचालन, बंदरों की धरपकड़ और नसबंदी की ट्रेनिंग देगा। इससे बंदरों की बेहिसाब बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगेगी। चिडि़यापुर के बाद इसे नैनीताल के रानीबाग और अल्मोड़ा में भी शुरु किया जायेगा।

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