हिन्दू मंदिर पाकिस्तान में संरक्षित !

हिन्दू मंदिर संरक्षित

reema1

कोलकाता। पाकिस्तानी लेखिका रीमा अब्बासी का कहना है कि पकिस्तान में हिंदू मंदिरों को अच्छी तरह से संरक्षित कर रखा गया हैं लेकिन वे रियल एस्टेट वाले मुख्य क्षेत्रों में स्थित हैं इसलिए उनमें से कुछ भू माफियों के निशाने पर हैं। गौरतलब है कि रीमा की ये बात उस समय सामने आयी है जबकि पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर खंडहरों में तब्दील होते जा रहे हैं।

हिन्दू मंदिर

‘‘हिस्टोरिक टेम्पल्स इन पाकिस्तान: अ कॉल टू कंशियन्स’ नाम की किताब लिखने वाली अब्बासी का कहना है कि  ‘‘पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों को अच्छी तरह से संरक्षित कर रखा गया है। सरकार इनका ध्यान रखती है लेकिन अब पुराने कारीगर वहां पर नहीं रहे इसलिए पूरी तरह से उनका जीर्णोद्धार नहीं किया जा सकता।’’

mandir2

एपीजे कोलकाता लिटरेरी फेस्टिवल :एकेएलएफ: में शामिल होने के लिए शहर में मौजूद लेखिका ने कराची में स्थित ‘पंचमुखी हनुमान मंदिर’ का उदाहरण दिया जहां एमक्यूएम पार्टी द्वारा मंदिर की मरम्मत कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि हिंदू मंदिर मुख्य क्षेत्रों में स्थित हैं जहां भू माफिया होटल या शॉपिंग मॉल बनाना चाहते हैं।

mandir

हिन्दू मंदिर जिनका निशां भी नहीं

हाल ही में बीबीसी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहर पाकपत्तन की मस्जिद पीर वारिस शाह के पहलू में प्राचीन मंदिर में एक अलग दौर की यादों का बसेरा है, जब हिंदू और मुसलमान एक ही गली से मस्जिद और मंदिर जाया करते थे। मस्जिद बाक़ी है, मंदिर मलबे का ढेर है। कभी ये हिंदू समुदाय की तीन सौ एकड़ में फैली इबादतगाह हुआ करती थी. अब इसका एक छोटा सा हिस्सा ही संरक्षित है। छज्जे पर एक क़तार में बेहद सफ़ाई से बनाई गईं मूर्तियाँ इतिहास और बदलते दौर की ख़ामोश ग़वाह हैं। छत पर किसी गुमनाम कलाकार की रामायण की कहानियों पर बनाई गईं पेंटिंगें थीं जिनको खुरच दिया गया है। मोहल्ले में पिछले 70 सालों से रहने वाले जमशेद बाबा ने बताया, “इस मंदिर में सिर्फ़ तोड़फोड़ ही नहीं की गई बल्कि यहां से सामान भी ग़ायब किया गया. इस इलाक़े में और भी बड़े मंदिर थे, एक गुरुद्वारा था लेकिन अब उनका नामो-निशान भी बाक़ी नहीं.”

सैकड़ों प्राचीन हिन्दू मंदिर जो इस इलाक़े के इतिहास और विरासत का हिस्सा हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सूफ़ी दरबारों, मंदिरों और गुरुद्वारों के इस पंजाब प्रांत में छह लाख से ज़्यादा हिंदू रहते हैं जिनके लिए इक्का-दुक्का बड़े धार्मिक स्थल ही रह गए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button