फ़ोर्ब्स की नजर में नोटबंदी का फैसला अनैतिक, कहा- भारत को होगा खरबों का नुकसान

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विपक्षी पार्टियों के लाख विरोध के बावजूद केंद्र सरकार नोटबंदी के मुद्दे पर भले ही बड़े-बड़े दावे करता नजर आ रहा हो, लेकिन अमेरिका की मशहूर पत्रिका फ़ोर्ब्स भी भारत सरकार के इस फैसले को गलत मान रही है। फ़ोर्ब्स पत्रिका ने अपने एक लेख में लिखा है कि नसबंदी के बाद यह दूसरा सबसे अनैतिक फैसला है जो भारत सरकार ने लिया है।

फ़ोर्ब्स

फ़ोर्ब्स ने नोटबंदी के मामले को बताया अनैतिक 

मिली जानकारी के अनुसार, फ़ोर्ब्स पत्रिका का कहना है कि नोटबंदी के फैसले से भारत को भारी नुसकान हो सकता है। मोदी सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब उठा सकते हैं। उनकी हालत पहले से ज्यादा खराब हो सकती है। फोर्ब्स पत्रिका ने 24 जनवरी 2017 के संस्करण में छापे जाने वाले लेख में यह व्यक्तव्य दिए है।

फ़ोर्ब्स पत्रिका के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ स्टीव फोर्ब्स ने लिखा है कि भारत की ज्यादातर नकदी को बंद कर दिया गया। स्तब्ध नागरिकों को नोट बदलने के लिए कुछ ही हफ्तों का समय दिया गया। सरकार पर्याप्त मात्रा में नए नोट भी नहीं छाप पाई। वहीं RBI ने जो नोट छापे भी उसका आकार भी दूसरे नोटों से भिन्न था। इसकी वजह से एटीएम मशीनों में भी इसे लगाने में समस्या हुई।

लेख में कहा गया है कि भारत भले ही तकनीकी मामले में बहुत मजबूत हुआ है लेकिन देश की आधी जनता आज भी गरीबी के साए में जिन्दा है। नोटबंदी की वजह से गांव से शहर आकर काम करने वाले कामगारों को भी मुसीबतों का सामना करना पड़ा है। इस फैसले की  वजह से कई लोगों के कारोबार ठप्प हो जाने के बाद इन कामगारों को वापस अपने गांव लौटना पड़ा।

फ़ोर्ब्स के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ज्यादातर नगदी पर निर्भर करती, उनका कहना है कि यहां ज्यादातर लोग नियमों और टैक्स के अतिरेक की वजह से अनौपचारिक तरीके अपनाते हैं। फोर्ब्स ने नोटबंदी की तुलना 1970 सत्तर के दशक में लागू की गई नसबंदी से की है। फोर्ब्स ने लिखा है कि 1970 के दशक में लागू की गई नसबंदी के बाद सरकार ने ऐसा अनैतिक फैसला नहीं लिया था।

फोर्ब्स ने नोटबंदी के फैसले को जनता की संपत्ति की लूट बताया है। फोर्ब्स ने लिखा है कि भारत सरकार ने उचित प्रक्रिया के पालन का दिखावा भी नहीं किया- किसी लोकतांत्रिक सरकार का ऐसा कदम स्तब्ध कर देने वाला है। भारत सरकार इस तथ्य को दबा रही है कि नोटबंदी के फैसले से भारत को दसियों अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवम्बर को एक स्तब्ध करने वाला फैसला सुनाते हुए देश की सबसे बड़ी करेंसी 500 और 1000 रुपये के नोट को अमान्य घोषित कर दिया था। सरकार ने पुरानी नोटों को बदलवाने के लिए 30 दिसंबर तक का समय दिया था। सरकार द्वारा मिले इन 50 दिन के समय में अपने नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर पूरा देश कतार में खड़ा हो गया। देश की जनता को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। नोट बदलवाने के चक्कर में अभी तक 105 लोगों की मौत भी हो चुकी है।

भले ही सरकार के इस फैसले की वजह से देशभर की जनता को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा हो लेकिन जनता ने भी सरकार के फैसले पर काफी उम्मीद जताई है। यही कारण है कि लाख परेशानी झेलने के बावजूद अभी तक जनता की ओर से न तो कोई बड़ा आंदोलन छेड़ा गया है और न ही किसी भी बैंक के बाहर भीड़ द्वारा किसी हिंसक वारदात को अंजाम दिया गया है। मोदी सरकार द्वारा लिया गया नोटबंदी का फैसला सही साबित होगा या नहीं, ये तो वक्त ही बतायेगा, लेकिन जनता ने पीएम मोदी पर पूरा भरोसा जताया है।    

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