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10 अप्रैल: वो दिन जब Titanic अपने पहले और आखिरी सफर पर हुआ था रवाना

नई दिल्ली:10 अप्रैल का वो दिन जब Titanic जहाज अपने बदकिस्मती से अनजान था और अपनी पहली और अंतिम यात्रा पर रवाना हुआ था। ब्रिटेन के South Hampton port से अपने अंतिम सफर के लिए रवाना हुए Titanic जहाज से जुड़ा मंजर जिक्र मात्र से आँखों को नम कर देता है। Titanic से जुडी कुछ ऐसी बातें आपको बताते हैं जिससे आप शायद अनजान होंगे।

सिर्फ पर्दे पर दिखने वाली फिल्म ही रह गई याद

1997 में जेम्स कैमरन की यह शानदार फिल्म जिसने कई तथ्यों को अपने आगे डिगने नहीं दिया। हक़ीक़त में Titanic जहाज कब बना, किसने बनाया, सफर पर रवानगी कब हुई ये सारी बातें बस फिल्म के साथ ही धुंधली हो गईं। याद है तो बस बड़े से Ship की deck पर बांहें फैलाए खड़े Leonardo DiCaprio और Kate Winslet और पानी का रौद्र रूप।

आज भी बाकी है हादसे की याद

Titanic की हादसे की वजह पर नज़र जरूर डाल लेनी चाहिए क्योंकि Titanic के साथ जो कुछ भी हुआ उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ लक्ज़री सुख, विलासिता और अतिमहत्वकांक्षा का था। इस जहाज को लेकर लालसा थी इतिहास बनाने की, इस बात की कि समुद्र में सबसे बड़ा जहाज पहली बार सबसे तेज गति से तैरा। लेकिन इतिहास इस बात का बना कि सबसे बड़े जहाज का पहला ही सफर आखिरी हो गया।

शांतिकाल में हुई सबसे बड़ी समुद्री आपदा

Titanic विश्व का सबसे बड़ा भाप से चलने वाला शिप था। South Hampton (England) से अपनी पहली यात्रा पर यह जहाज 10 अप्रैल 1912 को निकला था। चार दिन की यात्रा के बाद, 14 अप्रैल 1912 को एक Iceberg से टकरा कर डूब गया। हादसे में 1,517 लोगों की मृत्यु हुई। यह मौतें इतिहास की सबसे बड़ी समुद्री आपदा बन गईं।

ये कंपनी करती थी Titanic का संचालन

ओलंपिक श्रेणी का यात्री लाइनर टाइटैनिक का संचालन White Star Line (WSL), shipping company कर रही थी। इसका निर्माण Belfast (Ireland) के Harland ओर Wolff Ship yard में किया गया था। यहाँ से ये शिप 2,223 यात्रियों के साथ न्यूयॉर्क शहर के लिए रवाना हुआ था। टाइटैनिक के डूबने की मुख्य वजह इसका तेज गति से चलना था। टाइटैनिक के मालिक J. Bruce Ismay ने जहाज के कप्तान Edward Smith को जहाज को अत्यधिक गति से चलाने के लिए कहा था।

12 अप्रैल 1912 को Titanic को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनियां मिली थी। शिप के कैप्टन को लगा की बर्फ की चट्टान (Ice Berg) आने पर जहाज मुड़ जाएगा। बदकिस्मती से ऐसा नहीं हुआ। बर्फ की चट्टान आने पर वह अधिक गति के कारण समय पर नहीं मुड़ पाया और चट्टान से जाकर टकरा गया। इससे जहाज के आगे के हिस्से में छेद हो गए और लगभग रात्रि 11:40 पर वो डूबने लगा। तकरीबन 2:20 सुबह पर वह पूरा अटलांटिक महासागर में समा गया.

Titanic का निर्माण

Titanic का निर्माण 31 मार्च 1909 को American J.P. Morgan और International Mercantile Marine Co. की इन्वेस्टमेंट से शुरू हुआ। इसके पतवारों को 31 मई 1911 को जल में उतारा गया और तैयारी होने लगी कि अगले साल इसकी यात्रा शुरू कर दी जाए। Titanic की कुल लम्बाई 882 फीट और 9 इंच (269.1 मीटर), इसके ढालों की चौड़ाई 92 फीट (28.0 मीटर), भार 46,328 टन (GRT) और पानी के स्तर से डेक तक की ऊंचाई 59 फीट (18 मीटर) थी। जहाज में दो पारस्परिक जुड़े हुए चार सिलेंडर, triple-expansion steam engines और एक कम दबाव Parsons turbine (जो प्रोपेलर को घुमाते थे) था।

इसमें 29 boiler थे जो 159 कोयला संचालित भट्टियो से जुड़े हुए थे और जहाज को 23 समुद्री मील (43 km/h, 26 mph) की तेज गति प्रदान करते थे। 62Feet (19m) की उचाई की चार में से केवल तीन funnel काम करती थीं और चौथी funnel, वेंटिलेशन के लिए थी। इसके साथ ही यह जहाज को अधिक सजावटी और आकर्षक भी बनाती थीं। जहाज की कुल क्षमता यात्रियों और चालक दल के साथ 3549 थी।

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