13 गन्ना पर्यवेक्षक निर्दोष पाये जाने के कारण दोषमुक्त, 32 गन्ना पर्यवेक्षकों से…

लखनऊः उत्तर प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि न्याय की अवधारणा के अनुसार निर्दोष कार्मिको के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो यह सुनिश्चित कराना प्रत्येक विभागाध्यक्ष का परम कर्तव्य है। इसी सिद्धांत पर चलते हुये गन्ना विभाग द्वारा विभागीय कार्यवाही में निर्दोष पाये जाने के कारण 13 गन्ना पर्यवेक्षकों को दोषमुक्त करते हुये उनके विरुद्ध संस्थित की गयी अनुशासनिक कार्यवाही को बिना दण्ड के ही समाप्त कर दिया गया है।

इसके अलावा 56 गन्ना पर्यवेक्षकों के विरूद्ध आरोप सिद्ध पाये जाने की वजह से उन्हें लघु एवं वृहद दण्ड देते हुए अनुशासनिक कार्यवाही का निस्तारण किया गया है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये भूसरेड्डी ने बताया कि विभाग को शासकीय कार्यों में लापरवाही, सर्वे कार्य में अनियमितता, सट्टा नीति का उल्लंघन, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, मृतक, भूमिहीन एवं अन्य अनियमित सट्टों के नियम विरूद्ध संचालन सम्बन्धी तथा अन्य आरोपों में गन्ना पर्यवेक्षकों के विरूद्ध गन्ना किसानों व अन्य माध्यमों से शिकायतें प्राप्त हुयी थी।

प्रथम दृष्टया जांच में दोषी प्रतीत

शिकायतों की प्रथम दृष्टया जांच में दोषी प्रतीत होने वाले 69 गन्ना पर्यवेक्षकों के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रतिस्थापित करते हुए परिक्षेत्र एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। अभिलेखीय साक्ष्यों के परीक्षणोपरान्त उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियमों, शासनादेश के अन्तर्गत अपनी जांच आख्या प्रस्तुत की गयी।

56 आरोपी गन्ना पर्यवेक्षकों के विरूद्ध

अतिरिक्त 56 आरोपी गन्ना पर्यवेक्षकों के विरूद्ध जांच में आरोप सिद्ध पाये गये जिसके लिए उन्हें लघु एवं वृहद दण्ड दिया गया, इनमें से 32 पर्यवेक्षकों के विरूद्ध वसूली का आदेश देते हुए अनुशासनिक कार्यवाही का निस्तारण किया गया है।

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