भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 145 वीं जयंती आज

आईये जानते है आखिर क्यों हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है. भारत के लौह पुरुष- सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को मनाने के लिए भारत सरकार ने साल 2014 में इस दिन की शुरुआत की थी.

जीवनी: सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, सन 1875 में गुजरात के नडियाड में एक जमींदार परिवार में हुआ था. वे अपने पिता झवेरभाई पटेल और माता लाड़बाई के चौथे बेटे थे. उनके पिता जी एक किसान थे, जबकि उनकी माता एक आध्यात्मिक और धर्मपरायण महिला थी. आपको बता दें कि उनके तीन बड़े भाई नरसीभाई, विट्टलभाई और सोमाभाई पटेल और एक बहन थी जिसका नाम दहीबा पटेल था.

आईये जानते है आखिर क्यों हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है. भारत के लौह पुरुष- सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को मनाने के लिए भारत सरकार ने साल 2014 में इस दिन की शुरुआत की थी. पूरा देश इस वर्ष स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल की 145 वीं जयंती मना रहा है. सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में और 560 रियासतों से भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी. वे भारत के पहले उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री भी रह चुके थे. सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्र को एकजुट करने के प्रयासों को स्वीकार करने के लिए राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है.

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व

भारत के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय एकता दिवस के लिए आधिकारिक बयान में कहा, कि राष्ट्रीय एकता दिवस “हमारे देश की अंतर्निहित ताकत और लचीलापन को फिर से जोड़ने, एकता और अखंडता के लिए वास्तविक और संभावित खतरों का सामना करने का अवसर और हमारे देश की सुरक्षा प्रदान करेगा.”

एकता की मूर्ति

पटेल की 143 वीं वर्षगांठ पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का उद्घाटन किया. यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई 182 मीटर (597 फीट) है. यह केवड़िया कॉलोनी में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के सामने स्थित है.

राष्ट्रीय एकता दिवस की प्रतिज्ञा

साल 2019 में पीएम मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई. प्रतिज्ञा है: “मैं पूरी तरह से प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए खुद को समर्पित करता हूं और अपने साथी देशवासियों के बीच इस संदेश को फैलाने के लिए कड़ी मेहनत करता हूं. मैं इस प्रतिज्ञा को अपने देश की एकता की भावना से लेता हूं, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की दृष्टि और कार्यों से संभव हुआ. मैं भी अपने देश की आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने का दृढ़ संकल्प करता हूं.”

सरदार वल्लभभाई पटेल का निधन

साल 1950 में सरदार वल्लभभाई पटेल के स्वास्थ्य खराब रहने लगा, वहीं 2 नवंबर साल 1950 में उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि वे बिस्तर से भी नहीं उठ पाते थे, इसके बाद 15 दिसंबर साल 1950 में उन्हें हार्ट अटैक आया जिसके चलके महान आत्मा का निधन हो गया.

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