गड़बड़ कंपनियों कल तलवार चलाएगी सेबी

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मुम्बई। सेबी की कल यानी 14 जनवरी को बोर्ड बैठक होने जा रही है। इस बैठक में लॉग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की छूट का गलत फायदा उठाने वाली कंपनियों की नकेल कसी जा सकती है।
सेबी की बोर्ड मीटिंग में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के दुरुपयोग और शेयरों की कीमत चढ़ाने-गिराने पर चर्चा करेगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस और शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस के जरिये टैक्स चोरी के मामले में 32,000 एंटिटी पर सेबी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर है।
सख्ती के मूड में सेबी
माना जा रहा है कि मार्केट रेग्युलेटर ने लिस्टेड कंपनियों के शेयर प्राइस में खेल करने वाली कंपनियों, उनके फुलटाइम डायरेक्टरों और ऐसे ट्रेड में शामिल दूसरी संस्थाओं के खिलाफ सेबी कानून के सेक्शन 11बी को लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत सेबी के पास शेयर बाजार के हित में किसी एंटिटी या शख्स के खिलाफ आदेश देने का अधिकार है। इस धारा के तहत मार्केट रेग्युलेटर शेयरों में खरीद-फरोख्त से हुए फायदे को जब्त कर सकता है और वह ऐसे लोगों या एंटिटी के मार्केट में आने पर रोक लगा सकता है।
कैसे होता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का दुरुपयोग
ऐसा करने वाले किसी ऑपरेटर से संपर्क करते हैं, जिसका सीधे या परोक्ष तौर पर किसी लिस्टेड कंपनी पर कंट्रोल होता है। आमतौर पर यह पेनी स्टॉक होता है। लिस्टेड कंपनी संपर्क करने वाले को कम दाम पर प्रेफरेंशल बेसिस पर शेयर अलॉट करती है। इन शेयरों में एक साल का लॉक इन होता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स छूट के लिए भी इतनी ही समय सीमा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने देखा है कि ऐसी कई लिस्टेड कंपनियों के कैपिटल बेस में स्टॉक स्पिल्ट, बोनस शेयर के चलते कई गुना की बढ़ोतरी हुई है। बेनेफिशरी कथित तौर पर ऑपरेटर को कैश देते हैं। वे इसके लिए कई लेयर का इस्तेमाल करते हैं। यह रकम उतनी होती है, जितना बोनस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन जेनरेट किया जाना है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शेयर की बढ़ी हुई कीमत पर बेनेफिशरी उससे निकल जाए।
डिजिटल पेमेंट भी होगा अजेंडा
14 जनवरी को सेबी की बोर्ड मीटिंग में सभी पेमेंट्स को डिजिटाइज करने पर भी चर्चा हो सकती है। आईपीओ के लिए फाइलिंग फीस, टेकओवर फीस और म्यूचुअल फंड से मिलने वाले पेमेंट के लिए डिजिटल ऑप्शन का ऐलान किया जा सकता है। अभी भी मार्केट रेग्युलेटर को ये पेमेंट्स चेक और डिमांड ड्राफ्ट के जरिये मिलते हैं। बोर्ड मीटिंग में म्यूचुअल फंड्स को नई ‘ऑल्टरनेटिव सिक्यॉरिटीज’ में निवेश की इजाजत देने पर भी विचार होगा। इस कैटिगरी में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट शामिल हैं। सेबी बोर्ड के सामने इस मामले में जो प्रस्ताव आया है, उसमें एक रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट या इन्फ्रा ट्रस्ट में एनएवी के 5 प्रतिशत तक निवेश की बात है। इसके साथ, ऐसे प्रॉडक्ट में एनएवी के 10 प्रतिशत से ज्यादा का निवेश नहीं हो सकता। इंडेक्स और सेक्टर फंड्स के मामले में ऐसी कोई बंदिश नहीं होगी।

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