20 मिनट का ड्यूटी ब्रेक लेना पड़ा भारी, रेलवे ने छीन ली 44 साल पुरानी नौकरी!

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ससेक्स: ब्रिटेन के 60 वर्षीय पीटर इन दिनों रेलवे से अपनी नौकरी वापस पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि वे 44 साल से रेलवे में नौकरी कर रहे थे और वर्तमान में ससेक्स वेस्ट के अरुंडेल स्टेशन पर सिग्नलमैन थे। लेकिन रेलवे ने उन्हें महज 20 मिनट ब्रेक लेने के कारण नौकरी से निकाल दिया। वहीं रेलवे का आरोप है कि पीटर ऐसे समय सिग्नल बॉक्स बंद करके चले गए, जब ट्रैफिक सबसे अधिक होता है और जाम अधिक लगता है। पीटर ने लोगों की जान को खतरे मे डाला है। जिसके दण्ड स्वरुप उन्हें निलंबित कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, लिटिल हैम्पटन में रहने वाले पीटर (60) का आरोप है कि उन्हें छह घंटे से ज्यादा की शिफ्ट करनी थी, इसलिए नियमानुसार वे ब्रेक के हकदार थे। लेकिन उन पर गलत तथ्यों को मढ़कर नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने धरने पर बैठने का निश्चय किया है। पीटर को उनकी नौकरी वापस दिलाने के लिए रेलवे संघ हड़ताल पर है।

8 साल तक ड्यूटी पर ब्रेक की लड़ी थी लड़ाई

पीटर ने बताया कि उन्होंने साल 2008 से 2015 तक कार्य के दौरान ब्रेक को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ी थे। 2015 में वे मुकदामा जीते। उन्होंने बताया कि 8 जनवरी को जब वह ड्यूटी पर पहुंचे तो रोस्टर बदल दिया गया। ऐसे में उनके ब्रेक के वक्त कोई दूसरा कर्मचारी मौजूद नहीं था। उन्होंने अपने लाइन मैनेजर को ब्रेक लेने की जानकारी दी। साथ ही, मौके पर मौजूद तीन अन्य कर्मचारियों से सिग्नल पर ध्यान रखने के लिए कहा, पर सभी ने मना कर दिया। तीन दिन तक लगातार छह घंटे से ज्यादा की ड्यूटी करने के बाद वह जब 11 जनवरी को ब्रेक लेने के लिए सिग्नल बॉक्स बंद करने लगे तो दो मैनेजर स्टेशन पर पहुंचे और उन्हें घर जाने के लिए बोल दिया।

प्रशासन हुआ नर्म

पीटर को पहले 18 मई तक निलंबित किया था। लेकिन कुछ समय बाद उन पर खराब आचरण का आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया गया। नेशनल रेलवे यूनियन आरएमटी की ससेक्स कोस्ट शाखा के सचिव क्रिस रोडवे ने कहा कि यह पूरा मामला ही व्यवहारिक रुप से गलत है। उन्होंने कहा कि छह घंटे से अधिक ड्यूटी करने के दौरान पीटर ब्रेक का हकदार था। वहीं मैनेजर सिग्नल की जिम्मेदारी ले सकता था, लेकिन इसके बावजूद पीटर के साथ कठोर व्यवहार किस वजह से किया गया? इसकी जांच की जा रही है।

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