2017 में रेपो रेट को लेकर आरबीआई ने किया निराश, नहीं घटेगी ईएमआई

नई दिल्‍ली। 2017 में रेपो रेट के घटने का इंतजार कर लोगों को आरबीआई ने झटका दिया है। रिजर्व बैंक ने लोगों को राहत नहीं दी है। अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए आरबीआई ने कहा कि अभी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

2017 में रेपो रेट

2017 में रेपो रेट को लेकर था संशय

आरबीआई ने बिना बदलाव के रेपो रेट 6.25 फीसदी पर बरकरार है और रिवर्स रेपो रेपो रेट 5.75 फीसदी पर बरकरार है। वहीं सीआरआर (कैश रिजर्व रेश्यो) भी 4 फीसदी पर ही पहले की तरह बरकरार है। इससे लोगों की कर्ज सस्ते होने की उम्मीदों को झटका लगा है। आरबीआई ने एक अच्छा ऐलान किया जिसमें 13 मार्च से सेविंग खातों से भी कैश निकालने की लिमिट खत्म कर दी गई है।

#RBIPolicy  पर बैंकों ने दिया यह बयान

इधर बैंकों ने पहले ही साफ साफ कहा था कि ग्राहकों के लिए कर्ज की दरें पहले ही कम हो गई हैं इसलिए अब ज्यादा कटौती की उम्मीदें ना रखी जाएं। रेपो रेट में कटौती की उम्मीद के पीछे सबसे अहम कारण था कि दिसंबर में पिछली मौद्रिक नीति के बाद से रिटेल महंगाई घटी है। लिहाजा नोटबंदी के बाद खपत में जो गिरावट आई है उसे सुधारने के लिए रिजर्व बैंक से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदे थी पर आरबीआई ने ऐसा कुछ नहीं किया।

क्यों नहीं घटीं दरें?

जानकारों का मानना है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने के अनुमान के चलते दरें घटाने से परहेज किया। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नोटबंदी के बाद देश के ईको-सिस्टम पर असर देखा गया है और कुछ समय तक असर बना रहेगा। हालांकि कमेटी सीपीआई महंगाई को 4 फीसदी तक नीचे ले आने के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल जनवरी-मार्च के दौरान सीपीआई महंगाई 5 फीसदी तक रहने का अनुमान है।

रेपो रेट का असर आप पर कैसे पड़ता है ये समझें

बैंक एक से तीन दिन के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं और इस कर्ज पर रिजर्व बैंक जिस दर से ब्याज वसूलता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। अगर रेपो रेट कम होगा तो बैंक को कम ब्याज दर देनी पड़ेगी और इसका फायदा बैंक लोन की ब्याज दरें घटाकर आम आदमी को देता है। वहीं रिवर्स रेपो पर ही बैंक अपना पैसा आरबीआई के पास रखते हैं। यदि आरबीआई रेट कट करता है तो तो बैंकों को कर्ज की दरों में भी कटौती करनी होगी। ज्यादा से ज्यादा बैंक ब्याज दरों में कटौती करेंगे तो ग्राहकों की ईएमआई घटेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button