हर शख्स के लिए 2020 बना यादगार, क्यों इसके बारे में विस्तार से जानिये

नई दिल्ली: दुनिया के हर इंसान के लिए साल 2020 यादगार बन गया है। साल 2020 में कोरोना वायरस (Corona VIrus) से जुड़ी कड़वी यादें शायद कभी भी इसको नहीं भुलाया जा सकता है। लेकिन भारत वर्ष में यह साल भी राजनीतिक घटनाक्रमों से भरपूर रहा है। क्योंकि साल 2020 की शुरुआत राजनीतिक विरोध के साथ हुई थी और इसका अंत भी विरोध प्रदर्शनों से हो रहा है।

CAA का विरोध

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल दिसंबर महीने में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA बनाया था। इस कानून के पास होने के बाद इसपर बहुत ही ज्यादा बवाल मचा हुआ था। इसका विरोध राजधानी दिल्ली से शुरु होकर धीरे धीरे पूरे देश में फैल गया था और साल 2020 की शुरुआत में दिल्ली के शाहीन बाग समेत कई इलाके CAA के विरोध का केंद्र बन चुके थे।

इस प्रदर्शन का हिस्सा केवल शाहीन बाग ही नहीं बना बल्कि ऐसे प्रदर्शन देशभर के कई शहरों और कस्बों में हुए। इसके तहत प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार पर इन कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए सड़कें जाम कर बैठ गए थे। इन्हीं विरोध-प्रदर्शनों के कारण फरवरी में दिल्ली में दंगे भी भड़क गए। जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। इस प्रदर्शन को देश में कोरोना वायरस का कहर शुरू होने पर दिल्ली पुलिस ने जबरन खत्म करवा दिया।

युवाओं ने ‘मन की बातको नकारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रेडियो पर प्रसारित होने वाला मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ भी इस बार खूब चर्चा में रहा। जिसका कारण था डिसलाइक होना। दरअसल साल 2020 में 30 अगस्त को पीएम मोदी का मन की बात कार्यक्रम जो प्रसारित हुआ उसे BJP के आधिकारिक You Tube चैनल पर लाइक से कई गुना ज्यादा डिसलाइक मिले। और यह सब इसलिए हुआ क्योंकि NEET और JEE की परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। जिसके कारण छात्रों ने इसका विरोध मन की बात कार्यक्रम को डिसलाइक कर जताया।

कृषि बिल के विरोध में प्रदर्शन

लेकिन मामला यहीं नहीं शांत हुआ। साल के आखिरी होने तक एक बार फिर देश में सरकार के बनाए नए कानून का विरोध होने लगा। मामला इस बार देश के अन्नदाताओं से जुड़ा हुआ है। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानून के विरोध को लेकर पंजाब के सभी किसान सड़कों पर उतर आए और सरकार द्वारा लागू किए गए सभी कृषि बिल को वापस लेने की मांग करने लगे।

जिसके बाद पंजाब की सड़कों से लेकर राजधानी दिल्ली की सड़कों तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी। अब पूरे देश के किसान दिल्ली की ओर चल पड़े हैं और देखते ही देखते किसानों का यह प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन के रूप में बदल गया। इस आंदोलन में कई अन्नदाताओं ने अपनी जान भी गांवा दी।

किसान के इस आंदोलन को लेकर सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई। सरकार और किसान के बीच कई दौर बातचीत हुई लेकिन किसान सरकार के प्रस्ताव से खुश नहीं नजर आएं।वहीं किसानों के इस आंदोलन में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए देश की विपक्षी पार्टियों भी मैदान में उतर आईं।

साल का अंतिम दौर चल रहा है। लेकिन प्रदर्शन खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि किसानों का यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। ऐसे में इस साल और आने वाले साल 2021 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है, क्योंकि इस साल की शुरुआत भी प्रदर्शन से हुई थी और आने वाले साल की शुरुआत भी प्रदर्शन के साथ हो रही है।

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