मासूम की जान बचाने के लिए चाहिए 22 करोड़, परिवार ने पीएम मोदी से लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) ज़िले में एक डेढ़ साल की बच्ची को एक ऐसी बीमारी हो गई है जो देश के कुछ ही लोगों में पायी गई है। दिल्ली के एम्स अस्पताल (AIIMS Hospital) ने बच्ची को एसएमए टाइप टू की पुष्टि की है

मेरठ : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) ज़िले में एक डेढ़ साल की बच्ची को एक ऐसी बीमारी हो गई है जो देश के कुछ ही लोगों में पायी गई है। इस बच्ची का नाम इशानी (Ishani) है। दिल्ली के एम्स अस्पताल (AIIMS Hospital) ने बच्ची को एसएमए टाइप टू की पुष्टि की है।

प्रधानमंत्री से लगाई मदद की गुहार

डॉक्टरों ने बताया है कि इस बच्ची की जान बचाने के लिए 22 करोड़ का इंजेक्शन लगाना होगा। 22 करोड़ रूपए बच्ची के परिवार के लिए इकट्ठा कर पाना नामुमकिन है। लिहाज़ा परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से मदद की गुहार लगाई है। बच्ची के माता पिता, दादा -दादी बस एक ही बात बार बार दोहरा रहे हैं कि मासूम बच्ची की ज़िन्दगी बचा लीजिए सरकार।

ईशानी जिस दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है उसका नाम स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी (SMA) टाइप-2 (Spinal Muscular Atrophy Type-2) है। ऐसा दिन किसी को न देखना पड़े जो इस मासूम और इसके परिवार को देखना पड़ रहा है। बच्ची को जो टीका लगना है उसकी कीमत 22 करोड़ रूपए बताई गई है और इतनी बड़ी रकम बच्ची के परिजन अगर पूरी ज़िन्दगी भी कमाएंगे तो भी इकट्ठा नहीं कर पाएंगे।

सोशल मीडिया पर शुरू हुआ कैंपेन

इशानी मेरठ में ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित मास्टर कॉलोनी की रहने वाली है। उसके पिता अभिनव वर्मा (Abhinav Verma) दिल्ली की लॉजिस्टिक कंपनी में मात्र 25 हजार रुपए की नौकरी करते हैं। इशानी की माँ नीलम (Neelam) ग्रहणी हैं। अभिनव ने सोशल मीडिया (social media) पर लोगों से आर्थिक मदद की भावुक अपील की है।

इस परिवार को आर्थिक मदद की खास दरकार है। इशानी के इलाज के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन शुरू हो गया है। अब ये परिवार फिलहाल दुआ के सहारे ही है। अब देखना ये होगा कि क्या पीएम मोदी इस परिवार करते हैं या नहीं।

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बच्ची के पिता अभिनव के अनुसार जब वह 10 माह की थी तब उसके पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। जब नज़दीकी डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने कैल्शियम की दवाइयां दे दीं। कुछ दिन बाद हाथों ने काम करना बंद कर दिया। जब उसे दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में दिसंबर 2020 में दिखाया गया तो उसको न्यूरो प्रॉब्लम बताई गई।

26 दिसंबर को उसका गंगाराम अस्पताल में ब्लड सैंपल लिया गया और 12 जनवरी 2021 को जांच की रिपोर्ट आई। तब मालूम चला कि बिटिया में स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी (SMA) टाइप-2 है। जिसके लिए 22 करोड़ रूपए की ज़रूरत है।

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