26 अगस्त : महिला समानता दिवास (Women’s equality day ) , यही से हुए महिलाओं के वोट देने की पहल                  

26 अगस्त को महिला समानता के रूप में इसलिए मनाया जाता हैं क्योंकी इसी दिन अमेरिका के 19वे संविधान संसोधन में महिलाओं को समानता के अधिकार दिये गये थे … आपको बता दे की इसी संसोधन के बाद महिलाओ को पुरुषों की तरह वोट देने का अधिकार दिया गया था अब इस दिन को राष्ट्रीय से अंतररास्ट्रीय स्तर तक बड़े ही धूम धाम से बनाया जाता हैं कई संगठन और संस्थाए इसे अलग- अलग प्रतियोगिताओ द्वारा लोगों को महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूक करते हैं .

भारत में महिलाओं की हालत

बात करे महिलाओं के अधिकार की तो आज भी कुछ प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें घर एवं समाज की असामता का शिकार होना पड़ता हैं वही दूसरी ओर भारत की ही महिलाओं ने भारत का नाम राष्ट्रीय एवं अंतररास्ट्रीय स्तर पर ऊँचा कर देश का नाम रौशन किया है भारत में आज भी कुछ ऐसे प्रतिशत परिवार हैं जहां बचपन से ही लड़का- लड़की के बीच बेदभाव किया जाता है लेकिन भारत के आकड़ो की बात करे तो वही हरयाणा की महिलाओं ने राष्ट्रीय से लेकर अंतररास्ट्रीय स्तर तक खेल जगत में एक से बढकर रिकॉर्ड बनाये हैं

आइये जानते हैं कुछ महिलाओं के बारे में

 गुंजन सक्सेना “ ( द कारगिल गर्ल )”

 फ्लाइटर लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना (जन्म 1975) एक भारतीय वायु सेना (IAF) अधिकारी और पूर्व हेलीकाप्टर पायलट हैं। वह 1994 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुईं और 1999 के कारगिल युद्ध के दिग्गज हैं . जो युद्ध में जाने वाली पहली महिला IAF अधिकारी बन गईं (“युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरने वाली पहली महिला” के रूप में भी . चीता हेलीकॉप्टर उड़ाने वाले युद्ध क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रीविद्या राजन के साथ वह दो महिलाओं में से पहली हैं।

कारगिल युद्ध के दौरान उनकी मुख्य भूमिकाओं में से एक था कारगिल से घायलों को बाहर निकालना, परिवहन आपूर्ति और निगरानी में सहायता करना। कारगिल से घायल और मृतक, दोनों 900 से अधिक सैनिकों को निकालने के लिए वह ऑपरेशन का हिस्सा रही  .2004 में, आठ साल तक पायलट के रूप में सेवा देने के बाद, हेलीकाप्टर पायलट के रूप में उनका करियर समाप्त हो गया; महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन उनके समय के दौरान उपलब्ध नहीं थे .. और हालही में गुंजन सक्सेना नामक एक वेब सीरीज भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई जिसे जनता द्वारा काफी पसंद किया गया .

ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री, ममता बनर्जी, जिन्हें ममता दीदी के नाम से जाना जाता है, उन्होंने राज्य में 34 वर्षीय वाम मोर्चा सरकार का विरोध किया। देश की पहली महिला रेल मंत्री भी थीं। 1997 में, उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, तृणमूल कांग्रेस, एक वामपंथी-विरोधी पार्टी शुरू की। इन्होंने महिला शक्ति का जमकर प्रदर्शन किया .

दीपिका पादुकोण

दीपिका ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक भारत का नाम रौशन किया हैं दीपिका भारत की लडकियों के लिए किसी रोलेमॉडल के कम नहीं  नहीं है | वह एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री और निर्माता है। भारत में सबसे अधिक भुगतान वाली अभिनेत्रियों में से एक, उनकी प्रशंसा में तीन फिल्मफेयर पुरस्कार शामिल हैं। वह देश की सबसे लोकप्रिय हस्तियों की सूची में शामिल हैं, और टाइम ने 2018 में उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक का नाम दिया है।

पादुकोण “ मुंबई एकेडमी ऑफ़ द मूविंग इमेज “ के चेयरपर्सन हैं और “ लाइव लव लाफ फाउंडेशन “ के संस्थापक हैं, जो भारत में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करता है। नारीवाद और अवसाद जैसे मुद्दों के बारे में मुखर, वह स्टेज शो में भी भाग लेती है, एक अखबार के लिए कॉलम लिखा है, महिलाओं के लिए कपड़ों की अपनी लाइन तैयार की है, और ब्रांडों और उत्पादों के लिए एक प्रमुख सेलिब्रिटी एंडोर्सर है। पादुकोण ने अपने लगातार सह-कलाकार रणवीर सिंह से शादी की है

पी. टी उषा

पी.टी. 54 साल की उषा, अभी भी भारत के सभी समय के सबसे चर्चित ट्रैक और फील्ड एथलीट में से एक हैं। इनका नाम देशएक महान एथलीट में आज भी शामिल है …  वह भारत के लिए खजाने से कम नहीं है , हम भारतीयों को हमेशा गर्व होगा, लेकिन अब एक कोच के रूप में, वह अन्य महत्वाकांक्षी एथलीटों को उनकी विरासत को लेने में मदद कर रही हैं वास्तव में, उषा के एथलेटिक्स स्कूल की प्रशिक्षु, जिस्ना मैथ्यू, पदक प्राप्त किया हैं, उन्होंने हाल ही में एशियाई जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता ।

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