सुलझ गया 27 साल पुराना विवाद, इन दो देशों के बीच हुआ समझौता

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पिछले 27 सालों से यूरोप के दो देशों के बीच चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ ही गया है। दरअसल, यह विवाद टूटकर बने नए देश के नाम और मूल देश के कुछ हिस्सों को लेकर उत्पन्न हुआ था। दरअसल, साल 1991 में यूगोस्लाविया से अलग होकर नए देश रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया की स्थापना के बाद यूरोपीय देशों ग्रीस और मेसेडोनिया के बीच के बीच यह विवाद शुरू हुआ था, जिसका मुख्य कारण इस नए देश के दक्षिण में स्थित देश ग्रीस का कुछ हिस्सा था जिसका नाम भी मेसेडोनिया रखा गया था।

मिली जानकारी के अनुसार, यूनानी प्रधानमंत्री एलेक्सिस त्सिप्रास बीते 17 मई को सोफिया में यूरोपीय संघ-पश्चिमी बाल्कन शिखर सम्मेलन में मैसेडोनियाई प्रधानमंत्री ज़ोरान जैव के साथ मिले थे। तब इस मामले पर सालों से जमी बर्फ पिघलने की उम्मीदें लगाई जाने लगी थीं। अंत में 27 सालों तक चली लंबी बातचीत के बाद दोनों देश इस बात पर राजी हो गए हैं कि मेसेडोनिया को अब ‘रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मेसेडोनिया’ के नाम से जाना जाएगा।

मेसेडोनियन भाषा में इसे सेवेर्ना मकदूनिया कहा जाएगा। नए नाम की आधिकारिक घोषणा से पहले मेसेडोनिया की जनता और ग्रीस की संसद की मंजूरी जरूरी होगी।

ग्रीस के उत्तरी क्षेत्र का नाम भी मेसेडोनिया है। सिकंदर महान इसी क्षेत्र का रहने वाला था। इसी वजह से ग्रीस के नागरिक इस नाम को लेकर नाराज थे। ग्रीस का कहना था कि उसके हिस्से में आने वाला मेसेडोनिया यूनानी संस्कृति का प्रमुख भाग है।

नाम को लेकर हुए समझौते में भी स्पष्ट किया गया है कि नॉर्थ मेसेडोनिया को पुरानी ग्रीक सभ्यता से संबंधित नहीं माना जाएगा। उल्लेखनीय है कि मेसेडोनिया देश ने अपने एयरपोर्ट का नाम सिकंदर के नाम पर रखा है जिसको लेकर भी विवाद है। हालांकि दोनों ही देशों की जनता में कुछ लोग इसके समर्थन में हैं और कुछ लोग सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करने में जुट गए हैं।

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