28 जुलाई चंद्रग्रहण: दुष्प्रभाव से बचने के लिए रखें ये सावधानियां, करें इस मंत्र का जाप

दुनिया संसार में निरंतर बदलाव होते रहते हैं। इन बदलावों के साथ हमें बहुत सी चीज़ें देखने को भी मिलती है। हर साल दुनिया में सूर्यग्रहण तथा चंद्रग्रहण भी लगता है जिसका तरह-तरह का प्रभाव देखने को मिलता है। साल 2018 का चंद्रग्रहण इस माह 27 जुलाई को लगने जा रहा हगे जिसे ‘सूतक’ का सही समय भी बताया जा रहा है। ज्योतिषों के अनुसार इस माह आषाढ़ मास की शुक्ल की पूर्णिमा को चंद्रग्रहण लग रहा है।

28 जुलाई चंद्रग्रहण: दुष्प्रभाव से बचने के लिए रखें ये सावधानियां, करें इस मंत्र का जाप

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार चंद्रग्रहण पर अत्यंत खास संयोग बन रहा है, क्यूंकि ग्रहण के अगले ही दिन पवित्र सावन मास शुरू हो रहा है। बात करें ग्रहण की तो चंद्रग्रहण रात्रि 11 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगा जिसकी समाप्ति रात्रि 3 बजकर 5 मिनट पर होगी। जानकारों के अनुसार यह चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा।

इस चंद्रग्रहण को ‘ब्लड मून’ का नाम दिया गया है। खगोलविदों के अनुसार यह चंद्रग्रहण पूर्ण खग्रास चंद्रग्रहण होगा, जिसकी अवधि 103 मिनट की होगी। वैसे भी मान्यता रही है की ग्रहण काल में बहुत से काम ऐसे हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए, जैसे की खाना, पीना, सोना, गाने बजाना और गाना आदि।

चंद्रग्रहण शुरू होने के बाद धीरे-धीरे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़नी शुरू हो जाएगी। 28 जुलाई की देर रात 1 बजे के करीब पृथ्वी की छाया से चांद पूरी तरह से ढक जाएगा। रात लगभग 3 बजकर 49 मिनट पर पृथ्वी की छाया से चांद बाहर आएगा। 28 जुलाई लगभग 5 बजे के करीब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की विरल छाया से बाहर निकल जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण का प्रभाव हर मनुष्य पर पड़ता है। वैसे भी मान्यता रही है की ग्रहण काल में बहुत से काम ऐसे हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए, जैसे की खाना, पीना, सोना, गाने बजाना और गाना आदि।

ग्रहण काल में क्या सावधानियां रखें

ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।

ग्रहणकाल में सोना नहीं चाहिए। वृद्ध, रोगी, बच्चे और गर्भवती स्त्रियां जरूरत के अनुसार सो सकती हैं। वैसे यह ग्रहण मध्यरात्रि से लेकर तड़के के बीच होगा, इसलिए धरती के अधिकांश देशों के लोग निद्रा में होते हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

ग्रहणकाल में यात्रा नहीं करना चाहिए, दुर्घटनाएं होने की आशंका रहती है।

ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।

ग्रहण को खुली आंखों से न देखें।

ग्रहणकाल के दौरान महामृत्युंजय मत्र का जाप करते रहना चाहिए।

इन सावधानियों को बरतने के बाद आप ग्रहण के प्रकोप, प्रभाव और परिणाम से बाख सकते हैं।

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