बाबरी विध्वंस की 28वीं बरसी, आज के दिन इतने लोगों की हुई थी मौत, जानें इस काले दिन का इतिहास

बाबरी विध्वंस की 28वीं बरसी, आज के दिन 2 हजार से ज्यादा लोगों ने गंवाई थी अपनी जान, अयोध्या जिले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

अयोध्या: 6 दिसंबर यानी की आज बाबरी विध्वंस की 28वीं बरसी है। इस दिन को मुस्लिम समुदाय काला दिन (Black Day) मानते है। बरसी के मौके पर अयोध्या में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। इसके अलावा यदि कोई समुदाय कार्यक्रम आयोजित करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बाबरी विध्वंस मामला

बाबरी मस्जिद उत्तर प्रदेश के अयोध्या ज़िले में रामकोट पहाड़ी (“राम का किला”) पर एक मस्जिद थी। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में लाखों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया था। इस घटना के तुरंत बाद ही देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। इस दिन को मुस्लिम समुदाय में काला दिन माना जाता है। सन् 1527 में पहले मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया गया था।

मामले में दो एफआईआर दर्ज

28 साल पहले 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी। इस मामले में 6 दिसंबर 1992 को फैजाबाद में दो एफआईआर दर्ज हुई थी।  जिसमें से पहले एफआईआर नंबर 197 में ‘लाखों कारसेवकों’ के खिलाफ केस दर्ज हुआ और एफआईआर नंबर 198 में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, बाल ठाकरे, उमा भारती सहित 48 हिंदूवादी नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 1993 में यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया।

32 आरोपी हुए बरी

सीबीआई की विशेष अदालत ने 30 सितंबर 2020 को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कुल 32 आरोपियों को बरी कर दिया था। जिनके नाम है, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, एमपी की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, बीजेपी के सीनियर नेता विनय कटियार।

अदालत का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट से पहले इस मामले में 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया गया था। कोर्ट ने यह जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच जमीन बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के लंबी सुनवाई के बाद 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और विवादित जमीन रामलला को देने का आदेश दिया।

5 एकड़ की जमीन आवंटित

कोर्ट ने विवादित जमीन पर पूरी तरह से रामलला का हक माना और मुस्लिम पक्ष को भी अयोध्या जनपद में ही मस्जिद निर्माण के लिए जमीन देने की प्रक्रिया भी आधिकारिक रूप से पूरी कर दी गई। कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ की जमीन अयोध्या के सोहावल तहसील के रौनाही क्षेत्र के धन्नीपुर गांव में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आधिकारिक रूप से आवंटित कर दी है।

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