30 अप्रैल तक भूलकर भी ना हो ये गलती, वरना जिंदगी भर रहेंगे परेशान

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30 अप्रैलहिंदू धर्म में हर महीने का अपना अलग ही महत्‍व होता है। शास्‍त्रों और पुराणों में भी इस बात को स्‍पष्‍ट किया गया है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, 1 अप्रैल से वैशाख माह का आरंभ हो रहा है, जोकि 30 अप्रैल को वैशाख पूर्णिमा पर समाप्‍त होगा। मधुसूदन को इस महीने का देवता माना जाता है। पुराणों के मुताबिक, इस माह में जो भी व्‍यक्ति सूर्योदय से पहले स्‍नान करता है और पूजा उपासना करता है, उस पर भगवान विष्‍णु की दयादृष्टि हमेशा बनी रहती है।

30 अप्रैल तक वैशाख

स्कंद पुराण में बताया गया है कि महीरथ नामक राजा ने केवल वैशाख स्नान से ही वैकुण्ठधाम प्राप्त कर लिया था। इस महीने में व्रत रखने वाले को प्रतिदिन सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी तीर्थस्थान, सरोवर, नदी, कुएं या जलाशय में जाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। सूर्य को अर्घ्‍य देने के समय इस मंत्र का जाप भी करना चाहिए-

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वैशाखे मेषगे भानौ प्रात: स्नानपरायण:। अर्ध्य तेहं प्रदास्यामि गृहाण मधुसूदन।।

इस माह में इन बातों का ध्यान जरूर रखें-

इस महीने में तेल लगाना, दिन में सोना, कांसे के बर्तन में भोजन करना, दो बार भोजन करना, रात में खाना खाना आदि वर्जित माना गया है। इस महीने पंखा, खरबूजा एवं अन्य फल, अनाज आदि का दान करना चाहिए।

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वैशाख मास में जलदान का विशेष महत्व है। इस महीने में प्याऊ की स्थापना करवानी चाहिए।  व्रत करने वाले को एक समय भोजन करना चाहिए। वैशाख व्रत महात्म्य की कथा सुननी चाहिए तथा ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।

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