उन्नाव गैंगरेप केस : पीड़िता के आरोप पर CBI की मुहर, विधायक ने किया था रेप

लखनऊ। उन्नाव गैंगरेप केस में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे गैंगरेप के आरोप को सीबीआई ने सही पाया है। सूत्रों की माने तो सीबीआई ने उन पर लगे आरोपों की पुष्टि कर दी है। एक आरोपी महिला शशि सिंह की भूमिका पर सीबीआई ने कहा कि वो पीड़िता को नौकरी दिलाने के बहाने कुलदीप के घर लेकर गई थी। इसके अलावा मामले में पुलिस द्वारा शुरुआत में लापरवाही बरते जाने के भी सबूत मिले हैं।

कुलदीप सिंह सेंगर

फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट और घटनाक्रम की जांच करने के बाद सीबीआई ने विधायक पर लगे आरोपों को सही पाया है। फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट और घटनाक्रम को 4 जून 2017 को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह ने उसके साथ रेप किया था और 11 जून को पीड़िता को तीन युवकों ने अगवा किया और कार में गैंगरेप किया।

सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किए। कोर्ट के समझ भी उसने वहीं बयान दिए जो उसने पुलिस को अपनी शिकायत में दिए थे। आपको बता दें कि सीबीआई ने पीड़िता और आरोपी विधायक को आमने सामने बैठा कर पूछताछ की थी। सीबीआई के अफसरों ने दोनों से अलग-अलग हुई पूछताछ के तथ्यों को भी सामने रखा और एक-दूसरे से पुष्टि की।

क्या है मामला 

बता दें कि उन्नाव की रहने वाली एक युवती ने कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप और अपने पिता को मरवाने का आरोप लगाया है। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गुंडागर्दी और गैंगरेप का आरोप लगाते हुए गत 8 अप्रैल को पीड़िता का पूरा परिवार लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गया। इस दौरान पीड़िता ने आत्मदाह करने की कोशिश भी की।

9 अप्रैल को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पीड़िता के पिता की मौत हो गई। पीड़िता का आरोप है कि पिछले साल 4 जून को कुलदीप सिंह सेंगर और उसके कुछ गुर्गों ने उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसने पुलिस से इसका शिकायत की लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि दर्ज कराई गई प्राथमिकी में से विधायक कुलदीप सिंह का नाम तक हटा दिया गया। 10 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार किया गया।

सेंगर को सीतापुर जेल में किया गया शिफ्ट

आपको बता दें, बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मंगलवार (8 मई) को सुबह उन्नाव जेल से सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। यह कारवाई पीड़िता द्वारा हाईकोर्ट में गुहार लगाने के बाद की गई है।

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