अगर आपके पास है रिलायंस जियो का 4G फ़ोन, तो आने वाले दिनों में पड़ सकता है पछताना

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न्यू दिल्ली सबसे पहले 4जी लांच करने वाली पहली रिलायंस टेलीकॉम कंपनी ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। जियो का नेट और इसकी फ्री में कॉलिंग यही इसकी खासियत है लेकिन कुछ मामलों में कमी भी है। हर किसी को जियो की मुफ्त कॉलिंग-टेक्स्टिंग-रोमिंग बहुत पसंद आ रही है ।

जी हां और यह सच भी है। तो आइये आज हम आपको बताते हैं कि जियो का सिम किस मामले में कमजोर है । यह बात  सभी यूजर्स को शायद पता न हो कि जियो की इनकमिंग-आउटगोइंग का फायदा उठाने के लिए हर वक्त मोबाइल डाटा को ऑन रखना पड़ेगा। फिर भी कुछ लोगों को ये बात सुन कर हैरानी नहीं होगी।

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4जी वाले ग्राहक को क्या है नुकसान

लेकिन यह ऐसी बात है जो वाकई जियो यूजर्स के लिए चिंता का कारण बन सकती है। आपको इसके अलावा यह भी जानना बहुत जरूरी है कि क्यों जियो यूजर्स द्वारा मोबाइल डाटा बंद करते ही उनके फोन पर इनकमिंग-आउटगोइंग बंद हो जाएंगी?

बता दें कि इसके पीछे थोड़ी तकनीकी बाधा है। जिसे हम आपको बेहद आसानी तरीके से समझाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल यह तीनों नेटवर्क की जनरेशन के शॉर्ट फॉर्म हैं यानी सेकेंड जनरेशन (2जी) फॉर वायरलेस मोबाइल टेलीकम्यूनिकेशन, थर्ड जनरेशन (3जी) और फोर्थ जनरेशन (4जी)।

इन जनरेशन के बढ़ने के साथ ही मोबाइल टेलीकम्यूनिकेशन में डाटा की रफ्तार बढ़ जाती है। 3जी को जहां डब्लूसीडीएमए, यूएमटीएस, एचएसपीए भी कहा जाता था, वहीं 4जी को एलटीई (लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन) कहा जाता है। आजकल आने वाले तमाम 4जी स्मार्टफोन एलटीई आधारित होते हैं।

क्या है एलटीई (LTE) का मतलब

गौरतलब है कि हम यहां आपको बता रहे हैं जियो नेटवर्क के संबंध कुछ बातें तो, इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि वोल्टे (वीओएलटीई) क्या होता है। एलटीई एक तरह से 4जी का समानार्थी शब्द है। जबकि वोल्टे एक प्रोटोकॉल है जिसे एलटीई पर इस्तेमाल करते हैं ।

तो चलिए मै इस बातों को काम घुमाते हुए सीधे शब्दों में बताते हैं कि वॉयस ओवर एलटीई (वोल्टे) का मतलब क्या होता है एलटीई पर वॉयस कॉलिंग या फिर 4जी पर वॉयस का डाटा पैकेट्स के रूप में ट्रांसफर। यानी 2जी या 3जी की तुलना में वोल्टे पर बिल्कुल अलग तरह से बातचीत होती है। बातचीत को डाटा के छोटे-छोटे पैकेटों को मिलाकर एक बड़ा बंडल बना दिया जाता है और इसका डाटा ट्रांसफर के जरिये कॉलर-रिसीवर के बीच आदान-प्रदान किया जाता है। चूंकि यह डाटा ट्रांसफर 4जी पर होता है इसलिए इसकी कॉल क्वॉलिटी काफी अच्छी होती है।

अगर हम सीधे शब्दों में बताये तो आम यूजर्स को यह समझना जरूरी है कि एलटीई एक कार है जबकि वोल्टे उसमें लगा म्यूजिक सिस्टम। अब जब आपको पता चल गया है को वोल्टे के लिए एलटीई होना जरूरी है, तो आप अब तो यह साफ-साफ़ समझ गये होंगे कि इसके लिए आपको डाटा कनेक्टिविटी की जरूरत है। यानी कभी भी कॉलिंग-रिसीविंग के लिए हर वक्त आपको इंटरनेट से जुड़ा रहना होगा।

मोबाइल डाटा ऑन रखने से क्या होगा नुकसान

इसीलिए जियो की सेवाएं केवल एलटीई फोन पर उपलब्ध हैं। वहीं 2जी या बेसिक हैंडसेट्स पर जियो सिम डालने का कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि उनमें वोल्टे नहीं होता और कॉलिंग नहीं हो सकेगी। अब जब आपको इस बात का पता चल गई कि कॉल करने और रिसीव करने के लिए हर वक्त मोबाइल डाटा ऑन रहना चाहिए, तो ये भी जान लीजिए कि इसके क्या फायदे और नुकसान हैं ।

दरअसल हर स्मार्टफोन में तमाम ऐप्स होते हैं जो बैकग्राउंड में चलते रहते हैं। स्मार्टफोन के यह ऐप इंटरनेट यानी डाटा के जरिये चलते हैं। ऐसे में हर वक्त डाटा ऑन रहने से यह डाटा की खपत करेंगे।अब तक मोबाइल डाटा ऑन-ऑफ करके जो भी डाटा आप बचा लेते थे, वो नहीं बचा पाएंगे।

जिन जगहों पर 4जी नेटवर्क नहीं आता वहां कैसे कर पायेंगे आप कॉलिंग

अगर आप हर वक्त मोबाइल डाटा ऑन रहने से स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी खत्म होगी क्योंकि फोन के सारे ऐप हर वक्त इंटरनेट से जुड़े रहकर कुछ न कुछ नया नोटिफिकेशन या अपडेट देते रहेंगे। ऑल टाइम डाटा कनेक्टिविटी का नुकसान ऐसे में जल्द मोबाइल डिस्चार्ज होने के रूप में सामने आएगा और सामान्य बैटरी वाले यूजर को दिन में कम से कम तीन बार चार्जिंग की जरूरत पड़ेगी।

ऐसे स्थानों पर जहां 4जी नेटवर्क नहीं आता है या फिर आपके फोन में डाटा कनेक्टिविटी नहीं आ रही, कॉलिंग उपलब्ध नहीं हो सकेगी इतना ही नहीं नॉन वोल्टे फोन के लिए जियो कॉलिंग के लिए जियो ज्वाइन ऐप का इस्तेमाल करना होगा, जिसके लिए हर वक्त डाटा कनेक्टिविटी की जरूरत पड़ेगी।इस ऐप में थोड़ा सा पंगा या नेट कनेक्टिविटी में डिस्टर्बेंस बातचीत में बाधा डाल देगा.

 

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