4 साल पहले जिस व्यक्ति का हुआ था अंतिमसंस्कार, अचानक लॉकडाउन में आ पहुंचा घर

कानपुर देहात में डेरापुर तहसील क्षेत्र के कटेही गांव में रहने वाले शिवराम, मूलचंद, रामाधार और शिशुपाल दरवाजे पर खड़े व्यक्ति को देखकर सन्न रह गए। उनकी हालत ऐसी थी कि काटो तो खून नहीं, उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। घर के द्वार रामकिशोर खड़ा था, जिसकी चार साल पहले मौत होने की जानकारी पर तेरहवीं संस्कार कर चुके थे। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह उनका भाई है या कोई भटकी आत्मा। सहमे भाइयों की जान में जान तब आई जब रामकिशोर ने उनका नाम लेकर पुकारा। भाई को सामने जीवित देखकर गले लगाया तो उनकी आंखें भर आईं। इस बीच एकत्र गांव वाले भी उसे जीवित देखकर हक्के बक्के थे।

लॉकडाउन ने भर दीं खुशियां

कोराेना काल और लॉकडाउन में जहां लोग मुसीबतों का सामना कर रहे हैं, वहीं कानपुर देहात में दो परिवारों के लिए यह समय खुशनसीब साबित हुआ है। अभी हाल ही में रसूलाबाद के गांव में एक युवक वापस आया तो तीन सगे भाइयों को जीवनदान मिला क्योंकि उसकी हत्या में एक भाई दो साल जेल काट चुका था। अब फिर लॉकडाउन ने एक परिवार में खुशिया भर दी हैं, चार साल पहले मरा हुआ मानकर जिसकी तेरहवीं संस्कार तक कर दिया था वो जिंदा घर की चौखट पर लौट आया है। बीती पांच जून की देर शाम घर लौटे रामकिशोर द्विवेदी काे देखकर भाइयों का परिवार आज बेहद खुश है।

काम की तलाश में गए थे अहमदाबाद

70 वर्षीय रामकिशोर द्विवेदी अविवाहित हैं और आठ साल पहले गांव के कुछ लोगों के साथ काम की तलाश में अहमदाबाद गुजरात चले गए थे। वहां पर काम मिलने के बाद रामकिशोर एक साल के अंदर गांव में आकर परिवार से मिलकर फिर चले जाते थे। चार साल पहले अहमदाबाद से लौटे गांव के कुछ लोगों ने घरवालों को रामकिशोर की बीमारी से मौत होने की सूचना दी थी। इसके बाद रामकिशोर के भाइयों और परिवार वालों ने रामकिशोर की तेरहवीं संस्कार संपन्न कराकर शांति भोज करा दिया था। गांव के लोग भी शांतिभोज में शामिल हुए थे।

भाइयों से मिलने का मन किया तो लौट आए

रामकिशोर ने बताया कि अहमदाबाद की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। लाॅकडाउन में फैक्ट्री में काम बंद होने पर भाइयों की याद आई तो बस से गांव आ गए। उन्होंने बताया कि साथियों ने उनके मरने की सूचना गांव में क्यों दी यह पता नहीं है। गांव में बीवी बच्चे न होने के कारण बीते चार साल में गांव आने का मन नहीं किया था, इसलिए नहीं आए। ग्राम प्रधान अतुल यादव ने बताया रामकिशोर की शादी नहीं हुई थी। पांच जून को अहमदाबाद से आने पर रामकिशोर को प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटाइन कराया गया है। चार साल पहले रामकिशोर के मरने की सूचना पर परिजनों ने तेरहवीं संस्कार कर दिया था।

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