Red Sand Boa सांप की तस्करी में 4 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ो में है कीमत

पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो उसी की जानकारी सहित साबित हुई पुलिस ने सभी तस्करी कर रहे लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही ड्रम से रखे गए रेड सैंड बोआ सांप को भी रेस्क्यू कर लिया गया। 

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में दुर्लभ प्रजाति के सांपों की तस्करी का मामला सामने आया है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले के बाद 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह चारों लोग रेड सैंड बोआ ( Red sand boa ) प्रजाति के सांप की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। आरोपी इस सांप को 30 लाख रुपये में बेचने वाले थे।

आपको बता दें कि अधिकारियों ने बताया है कि साइबर सेल को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग रायपुर के पुराना राजेंद्र नगर स्थित एक मकान में दुर्लभ प्रजाति रेड सैंड बोआ सांप को लेकर आए हैं और उसे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। इसके बाद जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची की जानकारी सही साबित हुई पुलिस ने सभी तस्करी कर रहे लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही ड्रम से रखे गए रेड सैंड बोआ सांप को भी रेस्क्यू कर लिया गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सांप की कीमत

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि सांप को आंध्र प्रदेश के चित्तूर से 10 लाख रुपए में खरीदा था। जिसके बाद उन्होंने जसे 30 लाख रुपये में बेचने का प्लान बनाया था। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सांप की कीमत करोड़ों रुपए है। बताया गया है कि केरल निवासी सभी आरोपी पुराना राजेंद्र नगर इलाके में किराए के मकान में रहते थे।  तथा मकानों में पेंट लगाने का काम करते हैं। जिसमें आरोपी किरन आरपी (31), राज किरन (28), रिनु बी (27), और सानिल (33) को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सैंड बोआ नाम से क्यों जाना जाता है ये सांप?

रेड सैंड बोआ सांप को दो मुंहा सांप भी कहा जाता है। ये सांप बालू और रेत के नीचे छिप कर रहता है, इसी कारण इसका नाम सैंड बोआ ( Red sand boa ) पड़ा है। इस सांप की आंखें अनाकोंडा ( Anaconda ) की तरह उसके सिर पर होती हैं। जिसकी मदद से वह बालू में छिप कर अपनी आंखे बाहर रखता है और ऐसे में जब शिकार करीब आता है तो वो उस पर हमला कर देता है।

क्यों की जाती है सैंड बोआ की तस्करी

इस सांप का इस्तेमाल दवा बनाने से लेकर तांत्रिक विद्या में किया जाता है जिसकी वजह से इसकी स्मगलिंग बढ़ गई है। तस्कर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन करोड़ से 25 करोड़ के बीच बेचते हैं। साल 1972 में भारत सरकार ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसे संरक्षित घोषित कर दिया था। इसकी तस्करी करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

इस सांप की तस्करी ख़ासकर बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है। वही मध्य एशियाई देशों में यह माना जाता है कि इस सांप के मांस को खाने से कई बीमारियां ठीक होती हैं। जिसके कारण इस सांप की बड़े पैमाने पर तस्करी की जाती है लेकिन अभी तक इसका कोई भी वैज्ञानिक कारण सामने नहीं आया है।

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