जेल में आत्महत्या के मामलों में 40 प्रतिशत इजाफा, योग और काउंसिलिंग का लिया जा रहा सहारा

लखनऊ: कोरोना की वजह से साल 2020 बहुत ही बुरा गुजरा. दुनियाभर के लोग इससे काफी बुरी तरह प्रभावित हुए. एक वक़्त तक सबकुछ थम सा गया था. इस दौरान बाहरी दुनिया के आलावा एक और दुनिया थी जिसमें सब कुछ बदल चुका था. धीरे-धीरे वहां के लोग मानसिक तनाव का शिकार हो गए. नकारात्मकता चारों ओर फैल गई थी. हम बात कर रहे है जेल के अन्दर की दुनिया की. कैदियों के लिए कोरोना काल का दौर बहुत ही चुनौतियों से भरा रहा. अपनों से दूरी, चारदीवारी के सन्नाटे और अपराधबोध ने उन्हें ऐसा झकझोरा की उनकी मनोदशा बिगड़ गई. ऐसे में कई ने खुद को मौत के हवाले कर दिया तो कईयों की मानसिक स्तिथि गड़बड़ा गयी. रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते साल जेल में ख़ुदकुशी के मामले रिकॉर्ड 40 प्रतिशत बढ़े है.

अवसाद में आकर चुना मौत का रास्ता

कोरोना काल में सबकुछ ठप्प पड़ गया, आवाजाही पर पूरी तरीके से रोक लग गया था. कोर्ट भी बंद हो गए थे. ऐसे में पेशी के बहाने मिलने वाली खुली हवा भी उनसे पूरी तरीके से छीन गई. परिवार और करीबियों से न मिल पाने की वजह से वो अन्दर ही अन्दर घुटने लगे. चारदीवारी के अन्दर की ज़िन्दगी ने उन्हें अवसाद की ओर धकेल दिया. अकेलेपन, अपनों से दूरी और अपराधबोध ने उन्हें ऐसा घेरा कि वो मौत के जाल में फंस गए, उन्होंने उसे ही अपना रास्ता चुन लिया.

2019 की तुलना में 40 प्रतिशत बढ़े मामले

आंकड़ो के मुताबिक साल 2019 में प्रदेश की जेलों में 20 कैदियों के ख़ुदकुशी करने के मामले सामने आये थे. लेकिन 2020 में आंकड़ा बदल गया. 2020 में 28 लोगों ने मौत को गले लगाया. बीते साल की तुलना में यह 40 फीसदी ज्यादा है. डीजी जेल बताते हैं कि खुदकुशी करने वाले कैदियों में ज्यादातर ऐसे थे जो पेशेवर अपराधी नहीं थे. ऐसे लोगों ने ही मौत को गले लगाया जिन्होंने प्यार में कोई जुर्म कर दिया था या घर-परिवार के झगड़े में अपराध कर बैठे थे. माना जाता है कि इस तरह के कैदियों में अपराधबोध ज्यादा होता है और वह भावनाओं में आत्मघाती कदम उठा लेते हैं.

योग और काउंसिलिंग का सहारा

डीजी जेल आनंद की माने तो जेल प्रशासन की सावधानी और सक्रियता के चलते खुदकुशी के मामले अन्य प्रदेशों से काफी कम हैं. उन्होंने बताया कि कैदियों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों में कमी लाने के लिए और उनकी मनोदशा को एकाग्र एवं मजबूत करने के लिए उन्हें नियमित रूप से योग और ध्यान की प्रैक्टिस कराई जा रही है. मनोवैज्ञानिकों से उनकी काउंसिलिंग की भी व्यवस्था की गई है.

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