45 साल के बाद काम करने का मन नहीं करता

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मुंबई। सरकारी कर्मियों की रिटायरमेंट उम्र कहीं 58 साल तो कहीं 60 साल है। लेकिन एक खुलासे से पता चला है कि देश के 45 साल से अधिक के लोगों ने अगले पांच सालों में रिटायरमेंट की इच्छा जताई है। ऐसे लोगों की आबादी 61फीसदी है। इन 61 फीसदी लोगों का तर्क है कि काम के दबाव से उन्‍‍हें मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावित हो रहा है।

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द फ्यूचर ऑफ रिटायरमेंट हेल्दी न्यू बिगिनिंग्स’ रिपोर्ट से हुआ खुलासा

अंतरराष्ट्रीय बैंक एचएसबीसी ने कुछ दिनों पहले एक सर्वे किया था कि देश में कामकाजी आबादी के 61 फीसदी लोगों ने यह माना है कि उम्र के 45 साल के बाद काम करने का मन नहीं लगता लेकिन रिटायरमेंट में एक सबसे बड़ी बाधा जो बनती है वह फाइनैंशियल स्टैंड की। एचएसबीसी के ‘द फ्यूचर ऑफ रिटायरमेंट हेल्दी न्यू बिगिनिंग्स’ अध्ययन के नए संस्करण में कहा गया है कि सर्वे में शामिल 14 फीसदी का मानना है कि वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। उनमें से ज्यादातर का मानना है कि वे आर्थिक कारणों से रिटायर नहीं हो सकते।

तत्काल बनाएं रिटायरमेंट और बचत की योजना
एचएसबीसी बैंक के सर्वे में कहा गया है कि भारतीयों को बचत की जल्द शुरुआत करने और अपने रिटायरमेंट की योजना बनाने की तत्काल जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, 43 प्रतिशत कामकाजी लोग अगले पांच वर्षों में इसलिए रिटायर होना चाहेंगे ताकि वे अपने परिवार के साथ ज्यादा वक्त गुजार सकें। वहीं 34 प्रतिशत व्यक्ति घूमने और अपने दूसरे शौक पूरा करने के लिए रिटायर होना चाहते हैं। जबकि 20 फीसदी दूसरे कैरियर या अपनी इच्छा से काम करने के लिए रिटायर होना चाहते हैं। हालांकि, 59 प्रतिशत लोगों ने काम से जुड़े दबाव और मसलों को कारण बताते हुए रिटायर होने की इच्छा जाहिर की।

रिटायरमेंट दे सकता है नया अनुभव
एचएसबीसी इंडिया के रिटेल बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट के प्रमुख एस रामाकृष्णन ने कहा कि लोग समझ रहे हैं कि रिटायरमेंट उनके लिए कुछ नया करने का एक अवसर हो सकता है। लेकिन आर्थिक अड़चनों के कारण चाह कर भी रिटायर नहीं हो पाते। पांच में से एक का मानना है कि वे पूरी तरह रिटायर नहीं होंगे। इसलिए एक अच्छे फाइनेंशियल प्लानिंग की ज्यादा जरूरत है।

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