GST परिषद की हुई 45वीं बैठक, पेट्रोल-डीजल पर नहीं बनी बात, बिगड़े रहेंगे हालात

लखनऊ: वस्तु और सेवा कर (Goods and Services Tax) (GST) परिषद की 45वीं बैठक शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में हुई। इस अहम बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की। इस बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों और केंद्र सरकार तथा राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी शामिल रहे। परिषद की शुक्रवार को एक बड़ी बैठक में पेट्रोल और डीजल को अप्रत्यक्ष कर के दायरे में लाने की उम्मीद थी।

हालांकि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद को लगा कि यह पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने का समय नहीं है। परिषद ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया क्योंकि मौजूदा उत्पाद शुल्क और वैट को एक राष्ट्रीय दर में शामिल करने से राजस्व प्रभावित होगा।

पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में लाने पर चर्चा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लखनऊ में बैठक के बाद कहा, “जीएसटी परिषद ने आज केरल एचसी के आदेश के अनुसार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने के मुद्दे पर चर्चा की। लेकिन फैसला किया कि यह इसका समय नहीं है।” राज्यों ने डीजल, पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में शामिल करने के लिए बातचीत शुरू करने की किसी भी योजना का भी विरोध किया है।

बायो-डीजल पर जीएसटी दर

डीजल में मिश्रण के लिए बायो-डीजल पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई, जबकि माल ढुलाई के लिए राष्ट्रीय परमिट शुल्क को जीएसटी से छूट दी गई है।वित्त मंत्री ने कहा कि पट्टे पर दिए गए विमानों के आयात को भी आई-जीएसटी के भुगतान से छूट दी गई है।

 

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