लखनऊ के इंदिरा नगर में गैस चूल्हा गोदाम में भीषण आग, पांच की मौत

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लखनऊ : इंदिरानगर के गीत विहार कॉलोनी में बीती देर रात चूल्हा गोदाम में लगी आग से उठा धुएं का गुबार अपने संग पांच जिंदगियों को उड़ा ले गया। जिस वक्त यह दर्दनाक हादसा हुआ इसमें शिकार हुए सभी लोग नींद के आगोश में समाए हुए थे और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। लिहाजा, पूरा घर देखते ही देखते गैस चेंबर में तब्दील हो गया। आस पड़ोस के लोगों की सूचना पर पहुंची आधा दर्जन फायर टेंडर्स ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया लेकिन, तब तक सात माह की बच्ची, उसके माता-पिता, बुआ और चाचा की मौत हो चुकी थी। शुरुआती पड़ताल में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया।


नीचे गोदाम, ऊपर सो रहा था परिवार
मूलरूप से प्रतापगढ़ पट्टी निवासी तीरथ राज सिंह का इंदिरानगर के तकरोही स्थित गीत विहार कॉलोनी में दो मंजिला आलीशान मकान है। तीरथ राज सूर्या गैस चूल्हे के यूपी में डिस्ट्रिब्यूटर हैं। उनका ऑफिस इंदिरानगर स्थित सर्वोदयनगर में सुमित होम एप्लायंसेज के नाम से है। उनके मकान के ग्र्राउंड फ्लोर पर गैस चूल्हा, लाइटर रिफलिंग गैस सिलेंडर, सिलेंडर पाइप व अन्य सामान का गोदाम है जबकि फर्स्ट फ्लोर पर वह परिवार समेत रहते हैं। मकान में उनका बेटा सुमित (30), बहू जूली (26), पोती शक्ति उर्फ कीर्ति (7 माह), बेटी वंदना (26) और बहन का बेटा पुनीत (30) रहते थे जबकि उनकी पत्नी मीना सिंह प्रतापगढ़ स्थित गांव में रहती है। सोमवार को तीरथ राज सिंह अपनी पत्नी के पास प्रतापगढ़ के पट्टी गांव गए हुए थे।

ग्राउंड फ्लोर पर लगी थी आग
सीएफओ विजय बहादुर सिंह के मुताबिक, आग सबसे पहले मकान के ग्र्राउंड फ्लोर में लगी थी। ग्र्राउंड फ्लोर पर बने गोदाम में करीब एक ट्रक से ज्यादा सामान डंप था। शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने गोदाम में ज्वलनशील सामान को चंद मिनटों में अपने आगोश में ले लिया। देखते ही देखते आग से उठता जहरीला धुआं सीढिय़ों में भर गया। लिहाजा, परिवार के सदस्य जान बचाने के लिए नीचे नहीं आ सके। उधर, धुआं थोड़ी ही देर में पूरे मकान में भर गया।

रिस्पांस टाइम में देरी के चलते हुई मौत

स्थानीय लोगों का कहना है कि आग की लपटें देख पड़ोसी माया राम यादव ने मकान में रहने वाले सुमित को कई बार कॉल की, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। दूसरी तरफ कई बार फायर ब्रिगेड और 100 नंबर पर भी कॉल की गई, लेकिन फोन नहीं लग रहा था। कॉल रिसीव होने के बाद फायर ब्रिगेड और इंदिरानगर पुलिस को वहां पहुंचने में करीब 30 मिनट लग गये। जिसके चलते आग और धुएं ने पूरे मकान को अपने आगोश में ले लिया।

जलने से नहीं दम घुटने से मौत
सुबह करीब 3 बजे फायर ब्रिगेड की 7 गाडिय़ां मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, जिसके बाद मकान की तपिश कुछ कम हुई। सुबह 6 बजे पुलिस और फायर कर्मी जब फर्स्ट फ्लोर पहुंचे तो अलग-अलग कमरों से परिवार के पांच सदस्यों की डेडबॉडी मिली। तीरथ राज के बेटे सुमित और भांजे पुनीत की डेडबॉडी ड्राइंग रूम में मिली जबकि बहू जूली और सात माह की पोती कीर्ति उर्फ शक्ति की डेडबॉडी बेडरूम के बाहर मिली। करीब एक घंटे बाद बेटी वंदना की डेडबॉडी बाथरूम में मिली। बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़ कर शव को बाहर निकाला गया।

पिता को दी थी आग लगने की सूचना
हादसे की जानकारी मिलने पर प्रतापगढ़ से इंदिरानगर पहुंचे तीरथ राज ने बताया कि बेटी वंदना ने रात करीब 1:45 बजे फोन कर घर में आग लगने की सूचना दी थी। इस पर उन्होंने सभी परिजनों को छत पर जाने की सलाह दी। नीचे बरामदे में दो बाइक भी खड़ी थी, जो आग की चपेट में आने के बाद पूरी तरह से जल गईं। बाइक की टंकी में पेट्रोल होने के चलते दो धमाके भी हुए थे। धमाकों से परिवार के सदस्य और ज्यादा दहशत में आ गए।

पत्थर फेंका, फोन किया नहीं था रिस्पांस
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने के बाद परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए उन लोगों ने काफी जद्दोजहद की थी। उन्होंने फर्स्ट फ्लोर में लगी खिड़की में पत्थर फेंक कर कांच तोड़ा ताकि परिवार के सदस्य रिस्पांस कर सकें। वहीं पड़ोसी माया राम यादव सुमित के नंबर पर कई बार कॉल करते रहे। तीरथ राज भी आग की सूचना के बाद परिवार के हर सदस्य को फोन करते रहे, लेकिन किसी ने भी रिस्पांस नहीं दिया। सीएफओ का कहना है कि मकान में जहरीला धुआं भरने के चलते परिवार के सभी सदस्य बेहोश हो चुके थे, जिसके चलते वह रिस्पांस नहीं कर सके।

मकान में नहीं था कोई वेंटिलेशन

दो मंजिला इमारत में वेंटिलेशन न होना भी हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। वेंटिलेशन न होने की वजह से धुआं बाहर नहीं निकल सका। वहीं आग और धुआं पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड कर्मियों को भी मकान के पीछे खाली पड़े प्लाट से ग्राउंड फ्लोर में चार फीट दीवार काटकर और फर्स्ट फ्लोर पर करीब 6 फीट पर दीवार काटकर सेंध लगानी पड़ी, जिसके बाद स्थिति पर काबू पाया जा सके। तीन तरफ से लगातार पानी की बौछार करने से तीन घंटे बाद धुआं और आग को पूरी तरह से कंट्रोल किया जा सका।

‘हादसे में मासूम समेत पांच लोगों की जान चली गई। सभी की मौत जलने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई है। मकान में बना गोदाम इसकी मुख्य वजह है। गोदाम में कोई सुरक्षा उपकरण भी नहीं थे साथ ही वेंटिलेशन की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती जांच में आग का कारण शार्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। जांच अभी जा रही है। साथी ऐसे भवनों को भी चिन्हित किया जा रहा है जहां लोगों ने मानक के विपरीत गोदाम बना दिया है।’
– विजय बहादुर सिंह, चीफ फायर ऑफिसर

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