बिलकिस बानों को 50 लाख रुपए, सरकारी नौकरी और आवास देने का आदेश:- SC

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों की पीड़िता बिलकिस बानो को 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार बिलकिस बानो को सरकारी नौकरी और रहने की व्यवस्था भी करें, क्योंकि 2002 के दंगों के बाद से वह घूमक्कड़ जीवन जी रही है।

दंगों के वक्त बानो 21 साल की थी। दंगों में उसके तीन बच्चों को मार दिया गया था। गुजरात सरकार के 5 लाख रुपए के मुआवजे को ठुकराते हुए उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मौके पर चीफ जस्टिस गोगोई ने गुजरात सरकार के वकील हेमंतिका वाही से कहा कि आप खुद को खुशकिस्मत समझे की कोर्ट ने आपकी सरकार के बारे में कुछ नहीं कहा है।

पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह बांबे हाईकोर्ट के द्वारा दोषी करार दिए गए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी करें। बिलकिस बानो की ओर से पेश होने वाली वकील शोभा गुप्ता ने कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ने बांबे हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ली है। इनमें से एक इस साल सेवानिवृत्त होने वाले हैं और बाकी चार अधिकारी जो रिटायर हो चुके हैं उनके खिलाफ सिवाय पेंशन और पेशन पर दिए जाने वाले लाभों को रोकने के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

दंगों के वक्त बानों गर्भवती थी। उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया, जबकि उस वक्त उसके परिवार के बाकी छह सदस्य बचकर भागने में कामयाब रहे। इस केस का ट्रायल अहमदाबाद में शुरू हो गया था, लेकिन जब बिलकिस बानो ने गवाहों को धमकाने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ का अंदेशा जताया तो सुप्रीम कोर्ट ने केस को अगस्त 2004 में मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने मई 2027 में सात लोगों जिनमें पांच पुलिसवाले और दो डॉक्टर शामिल थे, को विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से छह अपील जुलाई 2017 में खारिज कर दी और कहा कि इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत है, जबकि एक अधिकारी ने फैसले के खिलाफ अपील नहीं की थी।

बिलकिस बानों के परिवार के सात सदस्यों ने दंगों में गवाई थी जान

स्पेशल कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में जनवरी 2008 को 11 लोगों को बिलकिस बानो से दुष्कर्म करने और उसके परिवार के सात लोगों को जान से मारने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन सात लोगों जिनमें पुलिसवाले और डॉक्टर शामिल थे को बरी कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर दोषियों में से तीन को वारदात का मुख्य आरोपी बताते हुए मृत्युदंड की मांग की थी।

अभियोग के मुताबिक 3 मार्च 2002 को भीड़ ने अहमदाबाद के नजदीक रंधिकपुर गांव में बिलकिस बानो के परिवार पर हमला किया था। दोषियों ने निचली कोट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था की सारे सबूत सीबीआई के द्वारा रचे गए हैं। बिलकिस ने घटना के बाद बच्चे को जन्म दिया है, जो सिद्ध करता है कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ था। और साथ ही उसके परिवार के किसी भी सदस्य के मृत शरीर ढूंढने में भी सीबीआई विफल रही है।

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