एक ‘सेक्सवर्कर’ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे

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नई दिल्‍ली। पिछले साल पीएम मोदी ने देश में नोटबंदी की थी। जिसमें 500 और 1000 के पुराने नोटों का चलन बंद हो गया था। ये कदम सरकार ने आतंक और भ्रष्टाचार खत्म करने को लेकर उठाया था। हालांकि जनता नोटबंदी से परेशानी तो जरूर हुई थी लेकिन फिर भी सब इससे खुश थे और सभी ने इस फैस्‍ले का स्वागत किया था। सरकार ने लोगों को अपने 500 और 1000 के पुराने नोट बदलवाने का काफी समया भी दिया था। लेकिन अब इसे लेकर अब एक मामला सामने आया है। ‘आयशा’ नाम का महिला ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है और अपने पुराने नोटों को बदलवाने के लिए कहा है।

500 और 1000 के पुराने नोट

500 और 1000 के पुराने नोट बदलवाने के लिए लिखी चिट्ठी

उसने लिखा कि उन्होंने भारत में अपने ग्राहकों से टिप में मिले कुछ पैसे बचा रखे हैं, मगर उनमें से अधिकतर पाँच सौ और हज़ार रुपए के पुराने नोट हैं, जो रद्द हो गए हैं। अत्यंत कष्ट और कलंक उठाकर कमाए गए उनके कुछ हज़ार रूपयों को यदि प्रधानमंत्री मोदी बदलवा दें, तो वो उनकी कृतज्ञ रहेंगीं। इस भावुक चिट्ठी का रेस्क्यू फ़ाउंडेशन की रूपाली शिभारकर ने हिन्दी में अनुवाद किया, फिर हाथ से लिखी उस चिट्ठी को आयशा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट कर दिया गया।

चिट्ठी में आयशा ने बताया कि बैंगलुरू के रेड लाइट एरिया में काम करते समय कोठे के मालिक हाथ में एक भी पैसा नहीं देते थे। मगर ग्राहक ख़ुशी से जो टिप देते थे, वो पेटीकोट के भीतर किसी तरह छिपाकर रख लेती थी, इनमें अधिकतर 500 और 1000 के पुराने नोट थे। लेकिन 31 दिसंबर को नोट बदलने की समय सीमा समाप्त होने के बाद उनके ये पैसे बेकार हो गए। पुणे के कटराज घाट स्थित रेडलाइट इलाक़े से आयशा को बाहर निकालने में शहर की पुलिस कमिश्नर रश्मि शुक्ला ने व्यक्तिगत दिलचस्पी ली थी।

वो कहती हैं, इस असहाय बांग्लादेशी लड़की के इतने कष्ट से कमाए गए पैसों के बर्बाद होने की बात सोचकर बहुत बुरा लग रहा है। उसकी चिट्ठी के बाद शायद केंद्र सरकार कुछ मदद करे। लेकिन अगर वो नहीं भी हो पाया, तो हम ये प्रयास करेंगे कि उसके बांग्लादेश लौटने से पहले उसे कुछ आर्थिक मदद दी जा सके।

आयशा के बारे में जानिए

दरअसल, आयशा बांग्लादेश की एक गार्मेंट फ़ैक्ट्री में नौ हज़ार रूपए के मासिक वेतन पर काम करने वाली तलाक़शुदा महिला आयशा (बदला हुआ नाम) को उनके ही एक सहकर्मी ने भारत में अच्छी नौकरी का लालच दिया था। उस व्यक्ति पर भरोसा कर, बिना माँ-बाप को बताए, दलाल के माध्यम से वो मुंबई पहुँचीं। मगर वहाँ उनके ही सहकर्मी ने मात्र 50 हज़ार रूपए में उन्हें एक नेपाली औरत को बेच दिया, जो एक वेश्यालय चलाती थी।

फिर आयशा को जबरन देह-व्यापार करना पड़ा। अलग-अलग लोगों के चंगुलों में फँसने के बाद, अंततः उनका ठिकाना बना पुणे का रेड लाइट इलाक़ा। वहीं से कुछ दिनों पहले पुणे शहर की पुलिस ने उन्हें छुड़ाया और एक ग़ैर-सरकारी संस्था के सुपुर्द कर दिया।

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