अब पासिंग मार्क्स से काम नहीं चलेगा, अगली क्लास में जाना है तो पास होना जरुरी

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नई दिल्ली। देशभर में शिक्षा व्यवस्था सुधारने को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी कमर पूरी तरह से कस ली है। इसके लिए वो शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन करने जा रही है। इसके मुताबिक, अब 5वीं और 8वीं के छात्रों को पढाई में दोगुनी मेहनत करनी होगी। अभी तक छात्र सिर्फ पासिंग मार्क्स के पीछे भागते थे। वो सोचते थे पासिंग मार्क्स न मिलने के बावजूद उन्हें अगली क्लास में एडमिशन मिल जायेगा।

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5वीं और 8वीं के छात्रों

लेकिन, अब इससे काम नहीं चलेगा। केंद्र का बच्चों पर ऐसा चाबुक चला है कि अगर एग्जाम में अच्छे मार्क्स नहीं मिले तो अगली क्लास में जाने के लिए उन्हें एग्जाम देना अनिवार्य होगा। इसके लिए तैयार संशोधन बिल को आज कैबिनेट की मंजूरी भी मिल सकती है। मंजूरी मिलने के बाद बिल को इसी सेशन से लागू किया जायेगा।

अगली स्लाइड में पढ़ें, इस बिल को 25 राज्य दे चुके हैं मंजूरी

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि राज्यों से समर्थन मिलने के बाद केंद्र जल्द ही 5वीं और 8वीं कक्षा में छात्रों के एग्जाम में फ़ैल होने पर उन्हें उसी क्लास में रोकने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि संसद में जो बिल पारित किया गया है, उसके प्रस्तावित विधेयक में राज्यों को मार्च से 5वीं और 8वीं के छात्रों के एग्जाम कराने का अधिकार दिया गया है।

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इस प्रस्ताव के मुताबिक, 5वीं और 8वीं के जो छात्र फेल हो जाते हैं उन्हें मई में एग्जाम में शामिल करने का एक आखिरी मौका दिया जायेगा। अगर छात्र इसमें भी नाकामयाब होते हैं तो उन्हें उसी क्लास में रोक दिया जएगा। हालांकि राज्य की इस नई पहल पर 25 राज्य पहले ही अपनी सहमति जता चुके हैं। अब बस मोदी कैबिनेट की मुहर लगने की देरी है।

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