आतंकी हमले के बाद एक बार फिर 673 तीर्थयात्री अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना

0

जम्मू। जम्मू से रविवार को अमरनाथ यात्रा के लिए 673 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था रवाना हुआ। एक अधिकारी ने कहा, तड़के 2.50 बजे कड़ी सुरक्षा में 24 वाहनों के काफिले में भगवती नगर यात्री निवास से 673 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। इस वर्ष 40 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी, जिसके बाद से सोमवार के जत्थे में सबसे कम यात्री शामिल हैं।

यह भी पढ़ें : सेना ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का बदला लिया, मार दिए तीन खतरनाक आतंकी

अमरनाथ यात्रा

अब तक 2.40 लाख तीर्थयात्री यात्रा कर चुके हैं

अब तक 2.40 लाख तीर्थयात्री यात्रा कर चुके हैं। कल (रविवार) ‘छड़ी मुबारक’ पूजा के लिए श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में ले जाई गई थी। ‘छड़ी मुबारक’ पारंपरिक दक्षिण कश्मीर के पहलागाम रूट पर विभिन्न स्थानों पर पूजा के बाद पवित्र गुफा में ले जाई जाएगी। छड़ी मुबारक को सात अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन गुफा में लाया जएगा, जिसके बाद यात्रा समाप्त हो जाएगी। इस दिन रक्षा बंधन भी है। इस साल अब तक अमरनाथ यात्रा में 48 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है।

यह भी पढ़ें : कुछ लोग जिन्हें देशद्रोही समझते हैं, उन्हीं मुसलमानों ने बचाई अमरनाथ यात्रि‍यों की जान

पुलिस के 35,000 से भी अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है

इनमें से 17 यात्रियों की मौत 16 जुलाई को श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सड़क दुर्घटना में हुई थी, जबकि आठ तीर्थयात्रियों की मौत 10 जुलाई को अनंतनाग जिले में स्थित बतेंगो में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में हुई थी। इनके अलावा 23 तीर्थयात्रियों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी)और राज्य पुलिस के 35,000 से भी अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

अमरनाथ यात्रा

10 जुलाई को हुआ था आतंकी हमला

बीते 10 जुलाई को कश्मीर में आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया था। हमले में नौ लोगों की मौत हो गई है और 19 जख्मी हुए थे। आतंकियों ने यात्रियों पर ही हमला नहीं किया बल्कि पुलिस पार्टी को भी निशाना बनाया था। बस के बारे में सुरक्षाबलों ने कहा कि वह काफिले का हिस्सा नहीं थी और न ही अमरनाथ श्राइन बोर्ड में उसका रजिस्ट्रेशन हुआ था। इस वजह ये आतंकियों का आसान निशाना बने। सुरक्षाबलों का कहना था कि हमारे काफिले के साथ जो भी बस या ट्रक में यात्री होते हैं, उनकी सुरक्षा पुख्ता होती है।

यह भी पढ़ें : हादसा: अमरनाथ यात्रियों को लेकर जा रही बस खाई में गिरी, 11 की मौत

इससे पहले सन 2000 में इस तीर्थयात्रा पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था। तब 30 लोगों की मौत हुई थी।  सोमवार की रात जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमले ने कई अनसुलझे सवालों को जन्म दिया है।

loading...
शेयर करें