68 साल में सातवीं महिला जज बनीं इंदु मल्होत्रा, CJI ने दिलाई शपथ

नई दिल्ली। वरिष्ठ वकील रहीं इंदु मल्होत्रा अब सुप्रीम कोर्ट की जज बन गई हैं, आज चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने उन्हें सभी जजों की मौजूदगी में शपथ दिलाई है। सुप्रीम कोर्ट के 68 साल के इतिहास में वे सातवीं महिला जज हैं। इतना ही नहीं इंदु मल्होत्रा देश की पहली ऐसी महिला वकील हैं जो बार (वकालत) से सीधे देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीश नियुक्त की गई हैं।

इंदु मल्होत्रा

केंद्र सरकार ने सीनियर एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को तो सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने को मंजूरी दे दी, लेकिन उनके साथ ही भेजा गया उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा विचार के लिए कॉलेजियम को वापस भेज दिया।

इंदु मल्होत्रा के पिता भी हैं वरिष्ठ वकील
वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा का जन्म 14 मार्च, 1956 को बेंगलुरु में हुआ था। इंदु मल्होत्रा के परिवार में अधिकांश लोग वकालत करते हैं। उनके पिता ओपी मल्होत्रा वरिष्ठ वकील थे। इसके अलावा उनके भाई व बहन भी वकालत के पेशे से जुड़े हुए हैं। 1983 में अपना करियर शुरु करने वाली इंदु ने दिल्ली विश्विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की है।

2007 में सीनियर ऐडवोकेट का दर्जा पाने वाली इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट की सातवीं महिला जज बन सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस समय 25 में से सिर्फ एक महिला जज है, इंदु दूसरी जज होंगी। 1988 में 26 नवंबर को इंदु को मुकेश गोस्वामी मेमोरियल अवॉर्ड से नवाजा भी जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनने का रिकॉर्ड एम फातिमा बीवी के नाम है, जोकि साल 1898 में देश की सर्वोच्च अदालत की की न्यायाधीश बनी थीं।

 

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