70 साल बाद इजरायल बना यहूदी देश, अरबी से बदलकर हिब्रू बनी राष्ट्रभाषा

येरुशलम: इजरायल की सरकार ने गुरुवार को संसद में ऐसा कानून पास करा लिया है, जिसके तहत अब वह आधिकारिक तौर पर यहूदियों का देश माना जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि अब देश में रह रहे अरब नागरिकों के साथ बड़े स्तर पर भेदभाव होगा। ये भी कहा गया है कि अविभाजित येरुशलम, इजरायल की राजधानी होगी। संसद में पास बिल को देशहित में लिया गया फैसला बताया गया है।

दरअसल, इजरायल की संसद में गुरुवार को विवादित ‘ज्यूस नेशन बिल’ को कानून मान्यता दे दी गई है। इसके मुताबिक, इजरायल अब यहूदी राष्ट्र होगा। इस कानून के तहत अरबी भाषा से देश की राष्ट्र भाषा का दर्जा भी छीन लिया गया है। संसद में 62 में से 55 लोगों ने इसके पक्ष में मतदान किया और हिब्रू भाषा को देश की राष्ट्रीय भाषा के तौर पर घोषित किया गया। हालांकि इजरायल के अरब सांसदों ने पास हुए नए बिल का विरोध किया है, और इसे पूरी तरह गलत करार दिया है।

इजरायल के लिए ऐतिहासिक दिन- पीएम नेतन्याहू

उधर, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार है। इसके मुताबिक, “इजरायल ऐतिहासिक रूप से यहूदी लोगों का निवास स्थान है। सिर्फ उन्हें ही यहां राष्ट्रीयता का हक मिलना चाहिए।” संसद में बिल को पास होने में 8 घंटे लगे। कानून में यरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित किया गया है। हीब्रू कैलंडर को देश का आधिकारिक कैलंडर घोषित किया गया है।

अरब सांसदों ने किया विरोध

संसद में बहस के दौरान ही अरब सांसदों ने इस कानून जमकर विरोध किया। एमके जमाल जहालका ने विधेयक के पन्नों को फाड़ कर पोडियम के पास फेंक दिया। । अरब सांसद अहमद तीबी का कहना है, “बिल पास होना दिखाता है कि देश में लोकतंत्र की हत्या हो गई है।” अरब अधिकारों के लिए लड़ने वाले एक गैर-सरकारी संगठन अदलाह ने कहा, “नया कानून नीतियों को जरिए एक नस्ल का खुद को श्रेष्ठ बताने की कोशिश है।”

इजरायल में 18 लाख अरब रहते हैं

आपको बता दें कि इजरायल की 80 लाख की आबादी में 20% (16 लाख) अरबी मुस्लिम रहते हैं। इजरायल के कानून के मुताबिक, अरबों को भी वहां यहूदियों की तरह ही अधिकार दिए गए हैं लेकिन वे लंबे समय से दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह बर्ताव होने और भेदभाव की शिकायतें करते रहे हैं।

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