85 साल बाद समुद्र में मिला फौजी का लव-लेटर, पढ़कर बेटी रोक न पाई आंसू

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1914-18 में हुए प्रथम विश्व युद्ध में कई सैनिकों की जान गई। इसमें कई ऐसे सैनिक भी थे जो अपने परिवार वालों से संपर्क करना चाहते तो थे लेकिन युद्ध की वजह से कर नहीं पा रहे थे। कुछ ऐसा एक नाम थॉमस ह्यूज का भी था। थॉमस ह्यूज पहले विश्व युद्ध में सैनिक थे। ये वही समय था जब ब्रिटेन, फ्रांस, रशिया, इटली और यूएस जैसे देश आपस मिलकर कई केंद्रिय ताकतों के खिलाफ इस जंग को लड़ रहे थे।

आज हम थॉमस ह्यूज के प्रेमपत्र की कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं। यह वही प्रेम पत्र था जिसे थॉमस ने युद्ध के दौरान अपनी पत्नी एलिजाबेथ के लिए लिखा था। इस पत्र अपनी पत्नी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने इसे एक कांच की बोतल में रखकर समुन्द्र में डाल दिया था जो 85 साल बाद 1999 में उनकी बेटी को मिला है।

प्रथम विश्व युद्ध

मछुआरे ने की मदद, बूढ़ी बेटी के हाथों में ही दिया पत्र

जी हां, 85 साल बहुत लंबा समय होता है। कई शहर बन के मिट जाते है कई नवजात अपने बुढ़ापे तक पहुंच जाते हैं। इस लंबे अंतराल के बीच इस फौजी की पत्नी भी अपने पति के बिन कितने दिन जिंदा रह पाती। लेकिन इन दोनों के प्यार का ये सबूत खत के रूप में 85 साल तक बिल्कुल वैसा का वैसा ही रहा न कोई आंच आई और न ही इसका एक शब्द भी पानी की छींटो में भीगा।

एक फौजी के प्यार भरे पत्र को 1999 के मार्च के महीने में थेम्स नदी से ढूंढा Steve Gowan नाम के मछुआरे ने। और फिर इसकी हकदार यानि उस फौजी की बेटी तक इसे पहुंचाया। आप सोचिए इस महिला के लिए इस उम्र में इससे ज्यादा खुशी की बात क्या रही होगी कि ये अपने मां-बाप का लिखा ये पत्र अपने बुढ़ापे में पढ़े।

इस पत्र को लिखने के दो दिन बाद ही 26 साल के Thomas Hughes( फौजी) को युद्ध में मार दिया गया था। जिसके बाद उनकी पत्नी एलीजाबेथ और उनकी बेटी न्यूजीलैंड की तरफ रहने आ गए थे। 1979 में एलिजाबेथ भी दुनिया को अलविदा कह गई थी। उस मछुआरे ने ये खत उनकी बूढ़ी बेटी के हाथ में जब ये पत्र थमा दिया । तब जाकर उस शख्स ने चैन की और खुशी की सांस ली।

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