9 दिवसीय Chaitra Navratri आज से शुरू, जानें अखंड ज्‍योति जलाने का महत्व और नियम

9 दिवसीय Chaitra Navratri इस बार आज यानी 13 अप्रैल 2021 से शुरू हुई है। आज मां दुर्गे के शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा होती है। Chaitra Navratri हिन्दू समाज के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है।

नई दिल्ली: 9 दिवसीय Chaitra Navratri इस बार आज यानी 13 अप्रैल 2021 से शुरू हुई है। आज मां दुर्गे के शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा होती है। Chaitra Navratri हिन्दू समाज के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। हिन्‍दू कैलेंडर के हिसाब से चैत्र नवरात्रि के साथ ही नए सल की शुरुआत भी होती है।

ज्ञान की प्रतीक है अखंड ज्‍योति

Chaitra Navratri के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है और इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना भी की जाती है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि नवरात्रि में देवी मां की मूर्ति, फोटो या कैलेंडर के आगे अखंड ज्‍योति जलाई जाती है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि इस ज्‍योति को जलाने के क्या नियम होते हैं? अगर नहीं मालूम है तो अखंड ज्‍योति को जलाने के लिए इन नियमों का पालन करें। ऐसी मान्यता है कि ये ज्योति ज्ञान, प्रकाश, श्रद्धा और भक्ति की प्रतीक होती है।

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अखंड ज्‍योति जलाने के नियम

1- अखंड ज्‍योति जलाने के लिए सबसे पहले बड़े आकार का मिट्टी या फिर पीतल का दीपक लें।
2- दीपक कभी भी खाली जमीन पर न रखें।
3- इस दीपक को हमेशा लकड़ी के पटरे या किसी चौकी पर ही रखें।
4- दीपक रखने से पहले उसमें रंगे हुए चावल डालें।
5- ध्यान रखें कि अखंड ज्‍योति की बाती रक्षा सूत्र से बनाई हुई हो। इसके लिए सवा हाथ का रक्षा सूत्र लेकर उसे बाती की तरह बनाएं और फिर दीपक के बीचों-बीच रख दें।
6- इसके बाद दीपक में घी डालें। अगर घी ना हो तो दीपक जलाने के लिए सरसों या तिल के तेल का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं।
7- अगर घी का दीपक जला रहे हैं तो उसे देवी मां के दाईं ओर रखें। ऐसी मान्यता है कि देवी मां प्रसन्न होती हैं।
8- दीपक जलाने से पहले गणेश भगवान, मां दुर्गा और भगवान शिव का स्मरण करें।
9- अगर किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए यह अखंड ज्‍योति जला रहे हैं, तो पहले हाथ जोड़कर उस कामना को मन में दोहराना चाहिए।
10 – फिर यह मंत्र पढ़ें :- “ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।”
11- अब दीपक के आस-पास कुछ लाल फूल भी रखें।
12- इस बात का ध्‍यान रखे कि अखंड ज्‍योति व्रत समाप्‍ति तक जलती रहे। इसलिए बीच-बीच में घी या तेल डालते रहें और बाती भी ठीक करते रहें।

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