रिसर्च : सिर के अलावा रीढ़ की हड्डी में भी होता है एक दिमाग

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वॉशिंगटन। सिर के अलावा रीढ़ की हड्डी में भी एक छोटे से मस्तिष्क का पता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह मस्तिष्क हमें भीड़ में गुजरते वक़्त, सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त संतुलन बनाने में मदद करती है। इसके साथ ही यह हमें फिसलने या गिरने से बचाती है।

ये सारे कार्य अचेतन अवस्था में होते हैं। रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के समूह पहले  संवेदी सूचनाओं को इकट्ठा करते हैं फिर उन्हें मांसपेशियों को भेजते हैं जो आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं।

कैलिफोर्निया स्थित एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान ‘साल्क’ के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के मुताबिक, हमारे रीढ़ की हड्डी में मौजूद छोटे से दिमाग को खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं। इस शोध के मुताबिक, हमारे शरीर में एक ब्लैक बॉक्स’ होता है। लेकिन अभी तक यी नहीं पता चल पाया है कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं।

प्रत्येक मिलीसेकेंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं, इसमें शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए संकेतक भी शामिल हैं। अपने अध्ययन में साल्क वैज्ञानिकों ने इस संवेदी मोटर नियंत्रण प्रणाली के विवरण के बारे में बताया है। इन्होंने तंत्रिका फाइबर का पता लगाया है, जो पैर में लगे संवेदकों की मदद से रीढ़ की हड्डी तक संकेतों को ले जाते हैं।

इन्होंने पता लगाया है कि ये संवेदक फाइबर आरओआरआई न्यूरॉन्स नाम के तंत्रिकाओं के अन्य समूहों के साथ रीढ़ की हड्डी में मौजूद होते हैं। इसके बदले आरओआरआई न्यूरॉन मस्तिष्क के मोटर क्षेत्र में मौजूद न्यूरॉन से जुड़े होते हैं, जो c और पैरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध हो सकते हैं।

इस रिसर्च को करने के लिए टीम ने जेनिटिक रूप से बढ़े हुए चूहे की रीढ़ की हड्डी में आरओआरआई न्यूरॉन को निष्क्रिय कर दिया। उसके बाद पता चला कि चूहे गति के बारे में कम संवेदनशील हो गए। गोल्डिंग की प्रयोगशाला के लिए शोध करने वाले शोधकर्ता स्टीव बॉरेन ने कहा कि हमें लगता है कि ये न्यूरॉन सभी सूचनाओं को एकत्र कर पैर को चलने के लिए निर्देश देते हैं।

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