#Bermuda triangle एक रहस्य जो अब तक लील चुका है दस हजार जानें

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बरमूडा ट्राइंगल अब तक कई जहाजों और विमानों को अपने आगोश में ले चुका है, जिसके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया। यह त्रिकोण अब क दस हजार के लगभग जाने लील चुका है। सबसे पहले 1872 में जहाज़ द मैरी बरमूडा त्रिकोण में लापता हुआ, जिसके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया। लेकिन बारमूडा ट्राइंगल का रहस्य दुनिया के सामने पहली बार तब सामने आया, जब 16 सितंबर 1950 को पहली बार इस बारे में अखबार में लेख भी छपा था।
दो साल बाद फैट पत्रिका ने ‘सी मिस्ट्री एट अवर बैक डोर’ शीर्षक से जार्ज एक्स. सेंड का एक संक्षिप्त लेख भी प्रकाशित किया था। इस लेख में कई हवाई तथा समुद्री जहाजों समेत अमेरिकी जलसेना के पाँच टीबीएम बमवर्षक विमानों ‘फ्लाइट 19’ के लापता होने का ज़िक्र किया गया था। फ्लाइट 19 के गायब होने की घटना को काफ़ी गंभीरता से लिया गया।
इसी सिलसिले में अप्रैल 1962 में एक पत्रिका में प्रकाशित किया गया था कि बरमूडा त्रिकोण में गायब हो रहे विमान चालकों को यह कहते सुना गया था कि हमें नहीं पता हम कहां हैं, पानी हरा है और कुछ भी सही होता नज़र नहीं आ रहा है । जलसेना के अधिकारियों के हवाले ये भी कहा गया था कि विमान किसी दूसरे ग्रह पर चले गए। यह पहला आर्टिकल था, जिसमें विमानों के गायब होने के पीछे किसी परलौकिक शक्ति यानी दूसरे ग्रह के प्राणियों का हाथ बताया गया। 1964 में आरगोसी नामक पत्रिका में बरमूडा त्रिकोण पर लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख को विसेंट एच गोडिस ने लिखा था।
इसके बाद से लगातार सम्‍पूर्ण विश्‍व में इस पर इतना कुछ लिखा गया कि 1973 मेंएनसाइक्‍लोपीडिया ब्रिटानिका में भी इसे जगह मिल गयी। वहीं बारमूडा त्रिकोण में विमान और जहाज़ के लापता होने का सिलसिला जारी रहा ।

बरमूडा त्रिकोण से जुड़े अनसुलझे घटनायें-

 

¤अबतक बरमूडा त्रिकोण में लापता हुआ जहाज़ :-
1872 में जहाज़ ‘द मैरी सैलेस्ट’ बरमूडा त्रिकोण में लापता हुआ, जिसका आजतक कुछ पता नहीं।
1945 में नेवी के पांच हवाई जहाज़ बरमूडा त्रिकोण में समा गये। ये जहाज़ फ्लाइट-19 के थे।
1947 में सेना का सी-45 सुपरफोर्ट जहाज़ बरमूडा त्रिकोण के ऊपर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया।
1948 में जहाज़ ट्यूडोर त्रिकोण में खो गया। इसका भी कुछ पता नहीं। ( डीसी-3 ).
1950 में अमेरिकी जहाज़ एसएस सैंड्रा यहां से गुजरा, लेकिन कहां गया कुछ पता नहीं।
1952 में ब्रिटिश जहाज़ अटलांटिक में विलीन हो गया। 33 लोग मारे गये, किसी के शव तक नहीं मिले।
1962 में अमेरिकी सेना का केबी-50 टैंकर प्लेन बरमूडा त्रिकोण के ऊपर से गुजरते वक़्त अचानक लापता हुआ।
1972 में जर्मनी का एक जहाज़ त्रिकोण में घुसते ही डूब गया। इस जहाज़ का भार 20 हज़ार टन था।
1997 में जर्मनी का विमान बरमूडा त्रिकोण में घुसते ही कहां गया, कुछ पता नहीं।

अमेरिकी नौ – सेना में टारपीडो बमवर्षक विमानों के दस्ते फ्लाइट 19 के पांच विमानों ने 5 दिसम्बर, 1945 को लेफ्टिनेंट चाल्र्स टेयलर के नेतृत्व में 14 लोगों के साथ `फोर्ट लोडअरडेल´, फलोरिडा से इस क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरी और फिर ये लोग कभी वापिस नहीं लौट सके। जिसमें पॉंच तारपीडो यान नष्‍ट हो गये थे। इस स्थान पर पहुंचने पर लेफ्टिनेंट टेयलर के कंपास ने काम करना बन्द कर दिया था। `फ्लाइट 19´ के रेडियो से जो अन्तिम शब्द सुने गए वे थे, ‘हमें नहीं पता हम कहाँ हैं, सब कुछ ग़लत हो गया है, पानी हरा है और कुछ भी सही होता नज़र नहीं आ रहा है। समुद्र वैसा नहीं दिखता जैसा कि दिखना चाहिए। हम नहीं जानते कि पश्चिम किस दिशा में है। हमें कोई भी दिशा समझ में नहीं आ रही है। हमें अपने अड्डे से 225 मील उत्‍तर पूर्व में होना चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि, और उसके बाद आवाज़ आनी बंद हो गयी।’ इस घटना के बाद 13 सदस्यों का बचाव दल एक समुद्रीयान के द्वारा `फलाइट 19´ की खोज में गया, परन्तु वह भी दुर्घटना का शिकार हो गया और कभी वापस नहीं आया।
इसी सिलसिले में अप्रैल 1962 में एक पत्रिका में प्रकाशित किया गया था, जलसेना के अधिकारियों के हवाले से लिखा गया था कि विमान किसी दूसरे ग्रह पर चले गए। यह पहला लेख था, जिसमें विमानों के गायब होने के पीछे किसी परालौकिक शक्ति का हाथ बताया गया था। इसी बात को विंसेंट गाडिस, जान वालेस स्पेंसर, चार्ल्स बर्लिट्ज़, रिचर्ड विनर, और अन्य ने अपने लेखों के माध्यम से आगे बढ़ाया।फ्लाइट 19 के गायब होने का घटनाक्रम में एरिजोना स्टेट विश्वविद्यालय के शोध लाइब्रेरियन और ‘द बरमूडा ट्राइंगल मिस्ट्रीः साल्व्ड’ के लेखक लारेंस डेविड कुशे ने काफ़ी शोध किया तथा उनका नतीजा बाकी लेखकों से अलग था।
उन्होंने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से विमानों के गायब होने की बात को ग़लत करार दिया। कुशे ने लिखा कि विमान प्राकृतिक आपदाओं के चलते दुर्घटनाग्रस्त हुए।
इस बात को बाकी लेखकों ने नज़र अंदाज कर दिया था। इस सम्‍बंध में चार्ल्‍स बर्लिट्ज ने 1974 में अपनी एक पुस्‍तक के द्वारा इस रहस्‍य की पर्तों को खोजने का दावा किया था। उसने अपनी पुस्‍तक ‘दा बरमूडा ट्राइंगल मिस्‍ट्री साल्‍व्‍ड’ में लिखा था कि यह घटना जैसी बताई जाती है, वैसी है नही।

बॉबरों के पायलट अनुभवी नहीं थे। चार्ल्‍स के अनुसार वे सभी चालक उस क्षेत्र से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे और सम्‍भवत: उनके दिशा सूचक यंत्र में ख़राबी होने के कारण ख़राब मौसम में एक दूसरे से टकरा कर नष्‍ट हो गये।
1918 में `साइक्लोप्स´, 1948 में `डीसी-3´, 1951 में `सी-124 ग्लोबमास्टर´, 1963 में `मरीन सल्फरीन´ और 1968 में परमाणु शक्ति चालित पनडुब्बी `स्कॉरपियन´ आदि जैसे कई जहाज़ तथा वायुयान इस क्षेत्र में या तो गुम हो चुके हैं या फिर किसी अनजान दुर्घटना के शिकार बने हैं। पिछली दो शताब्दियों में 50 से ज़्यादा जहाज, 20 से ज़्यादा वायुयान और हज़ार से ज़्यादा व्यक्ति बरमूदा त्रिभुज की रहस्यमयी शक्तियों के जाल में फंस चुके हैं।

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