बिहार में Black Fungus के मरीजों में उछाल, AIIMS पटना में बना वार्ड, जानें क्या है यह फंगस

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बताया कि बिहार में 50 के आसपास ब्लैक फंगस के मरीज है। इसके लिए AIIMS पटना में मुख्य रूप से वार्ड भी बनाया गया है

पटना: कोरोना संकट के बीच अब ‘ब्लैक फंगस’ (Black Fungus) म्यूकोर्मिकोसिस नाम की बीमारी लोगों में महामारी के रूप में तेजी से फैलते जा रही है। जिसका सीधा असर हमारी आंखो पर हो रहा है। बिहार (Bihar) के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बताया कि बिहार में 50 के आसपास ब्लैक फंगस के मरीज है। इसके लिए AIIMS पटना में मुख्य रूप से वार्ड भी बनाया गया है। निजी और सरकारी अस्पतालों में ब्लैक फंगस की दवाइयां भी भेजी गई है।

जानें क्या है ब्लैक फंगस?

‘ब्लैक फंगस’ (Black Fungus) एक ‘काला कवक’ है। जो काफी पुरानी बीमारी है। लेकिन कोरोना वायरस के दूसरी लहर में ‘ब्लैक फंगस’ अचानक तेजी से फैल रही है। ‘ब्लैक फंगस’ नाम की बीमारी म्यूकोर्मिकोसिस (Mucormycosis) नाम के फंगाइल से पैदा होती है। ये अधिकतर उन लोगों में होता है जिनमें पहले से कोई बीमारी हो या ऐसी दवा लेते हो जो इम्यूनिटी (Immunity) को कमजोर करती हैं। इसके साथ ही जो मधुमेह (Diabetes) के मरीज है।

मुख्य कारण

ये बीमारी उन लोगों में ज्यादा होती है जो (Wet Condition) नमी वाले जगह में रहते है। जिनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होता है। जो शुगर के मरीज है। ऐसे लोगों में ‘ब्लैक फंगस’ का खतरा और ज्यादा होता है। लेकिन अभी अचानक पिछले 2 हफ्तों में कोरोना वायरस Covid-19  से जो लोग ठीक हो चुके हैं उनमें ब्लैक फंगस की बीमारी ज्यादा तेजी से फैल रही है।

कोरोना के गंभीर मरीजों को डॉक्टर इलाज के दौरान स्टेरॉयड (Steroid tablets) टैब्लेट  देते है इससे शुगर लेवल बढ़ता है। लेकिन इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसलिए कोरोना के मरीजों को ठीक होने के बाद ‘ब्लैक फंगस’ होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। ब्लैक फंगस के ज्यादातर मरीज कोरोना (Corona) से उभर चुके लोग हैं।

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