हिंदी प्रेमी लोगों के लिए काफी अहम दिन, नागपुर में हुआ था पहला विश्व हिंदी सम्मेलन

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हर तारीख का कोई न कोई इतिहास होता है, लेकिन 10 जनवरी का इतिहास कई मायनों में, खासतौर पर हिंदी प्रेमी लोगों के लिए काफी अहम है| इस दिन विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है| पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में दस से 12 जनवरी के बीच साल 1975 में हुआ था।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की राष्ट्रभाषा के प्रति जागरुकता पैदा करने, समय-समय पर हिन्दी की विकास यात्रा का आकलन करने, लेखक व पाठक दोनों के स्तर पर हिंदी साहित्य के प्रति सरोकारों को और दृढ़ करने, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहन देने तथा हिन्दी के प्रति प्रवासी भारतीयों के भावुकतापूर्ण व महत्त्वपूर्ण रिश्तों को और अधिक गहराई व मान्यता प्रदान करने के उद्देश्य से ही 1975 में ‘विश्व हिन्दी सम्मेलनों’ की शृंखला शुरू हुई।

इस बारे में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने पहल की थी। पहला ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन’ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के सहयोग से नागपुर में सम्पन्न हुआ था। तब से अब तक नौ ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन’ हो चुके हैं। दूसरा विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरिशस के पोर्ट लुइस में 28 से लेकर 30 अगस्त के बीच 1976 को हुआ था।

इसके बाद तीसरा विश्व हिंदी सम्मेलन दिल्ली में 28 से 30 अक्टूबर के बीच साल 1983 में हुआ था। फिर चौथा विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरिशस में दो से लेकर चार दिसंबर के बीच 1993 में हुआ था।

चौथा विश्व हिंदी सम्मेलन दस साल के अंतराल के बाद हुआ था। उसके बाद पांचवां विश्व हिंदी सम्मेलन स्पेन, त्रिनिदाद और टोबैगो में चार से आठ अप्रैल के बीच 1996 में हुआ था। इसी तरह छठा लंदन में 1999 और ग्यारवां मॉरिशस के पोर्ट लुइस में साल 2018 में हुआ था।

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