ऐसा वर्ल्ड कप फाइनल जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी, मैच के बाद सुपर ओवर भी हुआ था टाई

पिछले साल 30 मई से 14 जुलाई तक आइसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप खेला गया था। ये वर्ल्ड कप का 12वां सीजन था, जिसके लिए 10 टीमों ने क्वालीफाई किया था। राउंड रोबिन फॉर्मेट में खेले गए इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने लीग दौर में सबसे ज्यादा मैच जीते थे और सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलियाई टीम थी। हालांकि, ये दोनों ही टीमें अपने-अपने सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड से हार गई थीं।

ऐसे में 14 जुलाई 2019 को लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर मेजबान इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला खेला गया। इस फाइनल को देखते हुए एक बात तो तय थी कि इस बार कोई नया चैंपियन दुनिया को मिलेगा, क्योंकि दोनों ही टीमों ने कभी विश्व कप का खिताब नहीं जीता था। अपने पहले खिताब के लिए लड़ाई लड़ रही इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ये मुकाबला अपने निर्धारित समय पर शुरू हुआ।

न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी, क्योंकि फाइनल मुकाबले में बाद में बल्लेबाजी करना आसान नहीं होता। कीवी टीम को उम्मीद थी कि वर्ल्ड कप 2015 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज मार्टिन गप्टिल कम से कम इस मैच में टीम की नैया को पार लगाएंगे, लेकिन आगाज मैच को छोड़ दें तो वे सभी मैचों में फ्लॉप रहे। यहां तक कि इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में भी गप्टिल महज 19 रन बना सके।

न्यूजीलैंड का पहला विकेट 29 रन के स्कोर पर गिरा, जबकि दूसरे विकेट के लिए कप्तान विलियमसन और हेनरी निकोल्स के बीच 74 रन की साझेदारी हुई, लेकिन विलियमसन 30 रन पर आउट हो गए। इसके बाद निकोल्स 55 रन बनाकर चलते बने। कीवी टीम को अंतराल पर झटके मिलते रहे, लेकिन टीम ने 50 ओवर बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट खोकर 241 रन बनाए। इंग्लैंड की तरफ से लियाम प्लंकेट और क्रिस वोक्स ने 3-3 विकेट झटके।

ऐतिहासिक फाइनल मुकाबले में 242 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम को अच्छी शुरुआत मिलती इससे पहले ही जेसन रॉय आउट हो गए। रॉय के बाद जो रूट और फिर जोनी बेयरेस्टो भी चलते बने। इसके बाद कप्तान इयोन मोर्गन से उम्मीद थी, लेकिन वे भी 9 रन बनाकर एक खराब शॉट पर आउट हो गए। इंग्लैंड की टीम ने 86 रन के स्कोर पर 4 विकेट खो दिए। किसी भी फाइनल में स्कोर का पीछा करते हुए ये आंकड़े खराब लगते हैं।

पांचवें विकेट के लिए ऑलराउंडर बेन स्टोक्स और जोस बटलर (59) ने बल्लेबाजी की और टीम को 200 के करीब पहुंचा दिया। इससे इंग्लैंड की टीम की जीत की नींव रखी जा चुकी थी, लेकिन कीवी गेंदबाज हार नहीं मान रहे थे। 203 पर इंग्लैंड के 6 बल्लेबाज आउट हो चुके थे, लेकिन बेन स्टोक्स अभी भी क्रीज पर थे। स्टोक्स पुछल्ले बल्लेबाजों को खिलाते रहे और उनसे स्ट्राइक रुटेट कराते रहे। एक समय ऐसा आया जब इंग्लैंड के हाथ से जीत निकल गई थी।

आखिरी के 2 ओवरों में इंग्लैंड की टीम को जीत के लिए 24 रन बनाने थे। इंग्लैंड के पास चार विकेट बचे थे। जिम्मी नीशम के 49वें ओवर में कुल 9 रन और 2 विकेट आए। आखिरी के ओवर में 15 रन इंग्लैंड को बनाने थे, जबकि दो विकेट या फिर 14 रन कीवी टीम को रोकने थे। गेंद टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट के हाथ में थी। बोल्ट के सामने बेन स्टोक्स थे, जो किसी भी तरह से रन बनाना चाहते थे, लेकिन एक रन नहीं लेना चाहते थे।

बोल्ट के आखिरी ओवर की पहली और दूसरी गेंद पर स्टोक्स रन नहीं ले पाए, लेकिन तीसरी गेंद पर उन्होंने छक्का जड़ दिया। पारी की चौथी गेंद पर काफी ड्रामा हुआ, क्योंकि अभी भी 3 गेंदों में 9 रन बनाने थे। स्टोक्स ने बोल्ट की चौथी गेंद को मिड विकेट पर मारा और बिना किसी भय के स्टोक्स दो रन के लिए दौड़ पड़े। स्टोक्स दूसरा रन पूरा करने वाले थे कि मार्टिन गप्टिल ने स्टंप्स पर थ्रो किया, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर बाउंड्री के पार चली गई।

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