पौराणिक मान्यताओं के अनुसार क्यों मनाया जाता है मकर संक्रान्ति (Makar Sankranti), किन किन चीजों का करें दान

सनातन धर्म में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर्व का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देवता का मकर राशि में प्रवेश होता है तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। आमतौर पर हर वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाती है।

नई दिल्ली: सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देवता का मकर राशि में प्रवेश होता है तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। आमतौर पर हर वर्ष मकर संक्रांति (Makar Sankranti) 14 जनवरी को ही मनाई जाती है।

साथ ही यह भी मान्यता है कि 14 जनवरी को ही सूर्य देवता और उनके पुत्र शनि देवता का मिलन भी होता है। कुछ ऐसी भी धार्मिक मान्यताएं है कि इसी दिन शुक्र ग्रह का भी उदय होता है। इस कारण से भी मकर संक्रांति पर्व का काफी शुभ माना जाता है। यदि शुभ मुहूर्त में पूरे विधि विधान से इन दिन सूर्य देवता का पूजा अर्चना करते हैं तो शुभ फल मिलता है।

इस दिन सूर्य छह माह के लिए उत्तरायण होते हैं, जिसके कारण यह पर्व उत्तरायण भी कहलाता है। इस दिन से खरमास समाप्त हो जाता है, जिसकी वजह से मांगलिक कार्य भी आरंभ हो जाते हैं। इस दिन सूर्य उपासना, अर्घ्य, स्नान और दान का बहुत महत्व माना जाता है। इस दिन किए गए दान का कई गुना ज्यादा पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन मुख्यतौर पर तिल, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र, घी आदि का दान करना चाहिए।

मकर संक्रांति पर ऐसे करें पूजा

 इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए। फिर नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। नहाने के पानी में तिल मिलाएं और उसी से नहाएं। इस दिन आपको साफ कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन आपको अपने सामर्थ्यनुसार दान करने का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद सूर्यदेव को तांब के लोटे में जल लेकर शुद्ध जल अर्पित करें। इस जल में लाल फूल, लाल चंदन, तिल और थोड़ा-सा गुड़ मिला लें। जो जल आप सूर्य को चढ़ा रहे हैं उसे तांब के बर्तन में ही गिराएं। जो जल इस बर्तन में इक्ट्ठा हो उसे जल मदार के पौधे में डाल दें। अगर मदार का पौधा न हो आस-पास में तो तुलसी के पौधे में डाल दें।

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