पंचांग के अनुसार जया एकादशी आज, जानिए व्रत की विधि और शुभ मूहर्त

एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को एकादशी मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को सभी व्रतो में सब से श्रेष्ठ माना गया है। यह व्रत गरुड़ पर सवार करने वाले भगवान विष्णु का है।

लखनऊ: एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को एकादशी मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को सभी व्रतो में सब से श्रेष्ठ माना गया है। यह व्रत गरुड़ पर सवार करने वाले भगवान विष्णु का है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु और माता दोनो का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आज 23 फरवरी 2021 मंगलवार को जया एकादशी का व्रत है। एकादशी का दिन सृष्टि के संरक्षक भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को समर्पित है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं, दरिद्रता दूर होती है, घर में सुख-शांती आती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जया एकादशी के दिन वैकुंठपति का नाम जपने से पिशाच योनि का भय नहीं रहता है।

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जया एकादशी पूजन विधि

इस दिन सुबह सूर्य उदय से पहले स्नान एवं नित्य क्रिया से निवृत हो कर। पवित्र मन से भगवान विष्णु का ध्यान लगा कर पूजन करना चाहिए। प्रसाद में तुलसी जल का आवशयक रुप से प्रयोग करना चाहिए। पूजा के समय धूप, दीप, अगरबत्ती,फल नारियल पूष्प आदि देवता के सामने अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जुआ खेलने वाले के वंश का नाश हो जाता है। इस दिन कटु वचन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्रोध और झूठ बोलना तो पूर्णता वर्जित है।

आपको बता दें इस एकादशी का शुभ मूहर्त 22 फरवरी शाम में 5:16 बजे प्रारंभ होता है। और तिथी समाप्त 23 फरवरी शाम 6:05 बजे होता है। यानि की व्रत की कुल अवधि 2 घंटे 17 मिनट का है। जया एकादशी पारण का शुभ मुहर्त 24 फरवरी को सुबह 6.51 बजे से लेकर सुबह 9.09 बजे तक है।

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