Acharya Swami Vivekananda : जानिए उप छाया चंद्र ग्रहण के बारे में

Acharya Swami Vivekananda : Astrology

लखनऊ: चंद्र ग्रहण आज दोपहर 12.48 बजे शुरू होगा और 4.47 बजे समाप्त होगा। हिंदू पंचाग के अनुसार इस दिन कार्तिक पूर्णिमा की तिथि है उपछाया ग्रहण होने के कारण मान्य नहीं होगा सूतक काल 2021साल का आखिरी चंद्र ग्रहण आज दोपहर 12.48 बजे शुरू होगा और 4.47 बजे समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण का चरम दोपहर बाद 2.34 बजे होगा।

इस बार का चंद्रग्रहण ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया, उत्तर अफरीका व दक्षिण अफ्रीका और यूएसए/दक्षिण अमेरिका में देखा जा सकेगा।

चूंकि इस बार का चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा इसलिए सूतक काल भी माना नहीं जायेगा। यही वजह है कि इस चंद्र ग्रहण में देश के मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं किए जाएंगे ।

कब लगता है चंद्रग्रहण

जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तो इस घटना को ही चंद्र ग्रहण कहते हैं. लेकिन जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया में रहता है तो पूर्ण चंद्रग्रहण होता है और जब चंद्रमा का सिर्फ एक भाग पृथ्वी की छाया में होता है तो ऐसी स्थिति में आंशिक चंद्र ग्रहण लगता है.

चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं

• पूर्ण चंद्र ग्रहण

• आंशिक चंद्र ग्रहण

• उपछाया चंद्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण उपछाया है तो भी ग्रहण जैसी सावधानियां वर्तनी चाहिए। वहीं कुछ का मानना है कि यह ग्रणह भारत विशेषकर उत्तर भारत के लोगों के लिए खास महत्व नहीं रखता। लेकिन आप अपने पंडित या घर के बुजुर्ग से इस बारे में सलाह के अनुसार उपाय अपना सकते हैं।

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए। खासकर ग्रहण के दौरान अपने पास किसी भी प्रकार का धारदार हथियार, चाकू, असलाह आदि न रखें। ग्रहण के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय मंत्र जाप करें। ग्रहण के बाद स्नान दान करें। इससे ग्रहण का दुष्प्रभाव कम होगा।

जानकारों के मुताबिक ग्रहण काल में गर्भ में पल रहे बच्चों को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिस विभिन्न उपाय अपनाने चाहिए।

गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं होगा।

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं रखें ये सावधानियां –

– ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।

– ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

– ग्रहणकाल में सहवास नहीं करना चाहिए।

– ग्रहणकाल में कैंसी, सूई, चाकू या धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें।

– ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।

– ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। हालांकि चंद्र ग्रहण देखने से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं होता।

– ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

चंद्र ग्रहण के बाद दूध और दूध से बने उत्पादों, सफेद तिल, सफेद कपड़े, इत्यादि का दान करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से भी ग्रहण के दुष्प्रभाव जीवन पर नहीं पड़ते हैं।

ग्रहण की समाप्ति के बाद क्या करें

 

:• ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें।

• इसके बाद घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियों को भी गंगाजल से शुद्ध करें।

• तुलसी पौधे पर भी गंगाजल का छिड़काव करें।

•ग्रहण काल से पूर्व ही कुश सभी खाद्य पदार्थो में अवश्य डालें।

आचार्य स्वामी विवेकानन्द जी
ज्योतिर्विद , वास्तुविद
श्रीधाम श्री अयोध्या जी

 

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